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बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक की हत्या, कट्टरपंथी भीड़ से जान बचाने के लिए नहर में कूदा मिथुन; डूबकर मौत

On: January 7, 2026 12:47 PM
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ढाका: बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर लक्षित हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक बार फिर अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा का गंभीर मामला सामने आया है। भंडारपुर गांव निवासी 25 वर्षीय हिंदू युवक मिथुन सरकार की मंगलवार दोपहर नहर (खारी) में डूबने से मौत हो गई। यह घटना नाओगांव जिले के हाट चकगौरी बाजार क्षेत्र की बताई जा रही है।


स्थानीय पुलिस के अनुसार, कुछ लोगों ने मिथुन सरकार पर चोरी का आरोप लगाया था, जिसके बाद कथित तौर पर उसका पीछा किया गया। खुद को बचाने के प्रयास में मिथुन पास की नहर में कूद गया, लेकिन बाहर नहीं निकल सका और देखते ही देखते लापता हो गया।


चार घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन


घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और फायर सर्विस की टीम मौके पर पहुंची। करीब चार घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शाम लगभग 4 बजे गोताखोरों की मदद से मिथुन सरकार का शव नहर से बरामद किया गया।


प्रारंभिक जांच के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए स्थानीय जनरल अस्पताल भेज दिया गया है।


चोरी के आरोप की पुष्टि नहीं


पुलिस ने साफ किया है कि फिलहाल इस बात की कोई पुष्टि नहीं हुई है कि मिथुन सरकार वास्तव में किसी चोरी की घटना में शामिल था या नहीं। मामले की जांच जारी है और सभी पहलुओं को खंगाला जा रहा है।


परिवार और समुदाय में आक्रोश


हालांकि आधिकारिक रूप से मौत का कारण डूबना बताया जा रहा है, लेकिन मृतक के परिजन और हिंदू समुदाय का कहना है कि मिथुन को डराने, घेरने और मानसिक दबाव में लाने वालों की भूमिका इस मौत के लिए जिम्मेदार है। उनका आरोप है कि अगर भीड़ उसका पीछा नहीं करती, तो वह नहर में कूदने को मजबूर नहीं होता।


स्थानीय लोगों का दावा है कि यह घटना कोई अलग मामला नहीं है, बल्कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा और भीड़तंत्र का एक और उदाहरण है।


पहले भी जा चुकी हैं कई जानें


समुदाय के लोगों ने आरोप लगाया कि इससे पहले भी उग्र भीड़ और कट्टरपंथी तत्वों की हिंसा में कई हिंदुओं की जान जा चुकी है। दीपू चंद्र दास, अमृत मंडल, राणा प्रताप बैरागी, खोकोन चंद्र दास, बजेंद्र बिस्वास और मणि चक्रवर्ती जैसे नामों को वे ऐसे मामलों की लंबी सूची में शामिल बताते हैं।


सरकार की चुप्पी पर सवाल


इन घटनाओं को लेकर बांग्लादेश की सत्ता और प्रशासन की ओर से अब तक ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे अल्पसंख्यक समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।


फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत की परिस्थितियों को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की बात कही जा रही है।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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