जमशेदपुर: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा थाना क्षेत्र में स्वर्णरेखा नदी से बरामद द्वितीय विश्व युद्ध काल के दो अमेरिकी बमों को भारतीय सेना की विशेष टीम ने बुधवार को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर दिया। इस संवेदनशील अभियान के दौरान प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरी सतर्कता बरती।
जानकारी के अनुसार, पहला बम करीब नौ दिन पूर्व नदी से मिला था, जिसका वजन लगभग 227 किलोग्राम बताया गया। वहीं दूसरा बम दो दिन पहले बरामद किया गया। दोनों बमों को निष्क्रिय करने के लिए सेना की विशेषज्ञ टीम पिछले तीन दिनों से बहरागोड़ा क्षेत्र में डेरा डाले हुए थी।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, एक किलोमीटर क्षेत्र खाली कराया गया
बम निष्क्रिय करने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले पुलिस और प्रशासन ने एहतियातन एक किलोमीटर के दायरे को ‘नो मूवमेंट जोन’ घोषित कर दिया। इस क्षेत्र में रहने वाले सभी लोगों को अस्थायी रूप से सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया। साथ ही किसी भी अनहोनी से बचने के लिए पूरे इलाके की निगरानी बढ़ा दी गई।
सेना की टीम ने बमों को निष्क्रिय करने के लिए ‘बंकर तकनीक’ का उपयोग किया। इसके तहत जमीन में लगभग 15 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया, जिसमें बमों को सावधानीपूर्वक रखा गया। इसके बाद उन्हें बालू से भरी बोरियों से ढक दिया गया, ताकि संभावित विस्फोट का असर सीमित क्षेत्र तक ही रहे।
पूरी प्रक्रिया को अत्याधुनिक तकनीक के जरिए रिमोट कंट्रोल से अंजाम दिया गया। करीब एक किलोमीटर दूर से तार जोड़कर दोनों बमों को अलग-अलग समय पर निष्क्रिय किया गया। इससे पहले सेना के ड्रोन द्वारा पूरे क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण भी किया गया, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी व्यक्ति खतरे की सीमा में मौजूद न हो।
पहले बम को निष्क्रिय करने के लगभग 30 मिनट बाद दूसरे बम को भी डिफ्यूज किया गया। इस दौरान जोरदार धमाका हुआ, जिससे आसमान में काले और सफेद धुएं के गुबार उठते दिखाई दिए। विस्फोट के प्रभाव से उस स्थान पर गहरा गड्ढा बन गया।
डिफ्यूज प्रक्रिया पूरी होने के बाद सेना के जवानों ने मौके का निरीक्षण किया और पुष्टि की कि दोनों बम पूरी तरह निष्क्रिय हो चुके हैं। इसके बाद ही आम लोगों को क्षेत्र में वापस जाने की अनुमति दी गई।
इस घटना को देखने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए थे। हालांकि, पुलिस ने कड़ी मशक्कत कर भीड़ को सुरक्षित दूरी पर बनाए रखा, ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके।
यह पूरा अभियान भारतीय सेना की दक्षता और सूझबूझ का एक उत्कृष्ट उदाहरण साबित हुआ, जिससे एक बड़ी संभावित दुर्घटना टल गई।












