हजारीबाग: साल 2022 के बहुचर्चित रूपेश पांडेय हत्याकांड में सीबीआई की विशेष अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। मामले की सुनवाई कर रही सीबीआई के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने सोमवार को तीन आरोपियों को दोषी करार दिया, जबकि साक्ष्यों के अभाव में दो अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया। दोषी ठहराए गए आरोपियों की सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए अदालत ने 5 फरवरी 2026 की तिथि निर्धारित की है।
अदालत ने जिन तीन आरोपियों को दोषी माना है, उनमें मोहम्मद असलम अंसारी उर्फ पप्पू मियां, मोहम्मद कैफ और मोहम्मद गुफरान शामिल हैं। वहीं, मोहम्मद इरफान और इस्तखार मियां को अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। इस मामले में एक अन्य आरोपी नाबालिग है, जिसकी सुनवाई फिलहाल किशोर न्याय बोर्ड (जेजे बोर्ड) में लंबित है।
क्या है पूरा मामला
यह हृदयविदारक घटना 6 फरवरी 2022 की है। 18 वर्षीय रूपेश पांडेय अपने चाचा के साथ हजारीबाग जिले के बरही में सरस्वती पूजा देखने गया था। पूजा के बाद विसर्जन जुलूस के दौरान माहौल अचानक उग्र हो गया। आरोप है कि उन्मादी भीड़ ने रूपेश पांडेय को घेरकर बेरहमी से पीटा, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया था और कानून-व्यवस्था की स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन को कड़े कदम उठाने पड़े थे।
शुरुआती जांच और CBI को केस
घटना के बाद बरही थाना में कुल 27 आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 7 फरवरी 2022 को चार आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था। हालांकि, मामले की गंभीरता और निष्पक्ष जांच की मांग को देखते हुए यह मामला अदालत तक पहुंचा।
झारखंड हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति एस. के. द्विवेदी की अदालत ने 2 सितंबर 2022 को इस हत्याकांड की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने का आदेश दिया था। इसके बाद CBI ने मामले की विस्तृत जांच कर चार्जशीट दाखिल की और गवाहों के बयान, तकनीकी साक्ष्य व अन्य दस्तावेजों के आधार पर अदालत में पक्ष रखा।
अब अदालत द्वारा तीन आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के बाद 5 फरवरी को सजा के बिंदु पर बहस होगी। इस फैसले पर न केवल पीड़ित परिवार बल्कि पूरे इलाके की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह मामला लंबे समय तक सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बना रहा है।














