
भावनगर: गुजरात के भावनगर में हत्या के आरोपी की पुलिसकर्मियों द्वारा सरेआम पिटाई किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि गुजरात सरकार पहले ही पुलिसकर्मियों को आरोपियों के साथ सार्वजनिक रूप से मारपीट करने से रोकने के लिए स्पष्ट निर्देश जारी कर चुकी है।
जानकारी के मुताबिक, पुलिस 25 वर्षीय फैजल उर्फ खटकी लखानी को भावनगर के नीलमबाग थाना क्षेत्र स्थित एसटी बस स्टैंड पर क्राइम सीन रीक्रिएट कराने के लिए पहुंची थी। इसी जगह पर फैजल ने अपनी लिव-इन पार्टनर काजल बरैया की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में आरोपी फैजल को पुलिसकर्मियों के कब्जे में देखा जा सकता है। वीडियो में आरोपी के हाथ-पैर रस्सियों से बंधे नजर आ रहे हैं। इसके बाद पुलिसकर्मी उसे सड़क पर घसीटते हुए दिखाई देते हैं। कुछ दृश्यों में पुलिसकर्मी आरोपी पर लाठियां बरसाते हुए भी नजर आ रहे हैं।
वीडियो के एक अन्य हिस्से में आरोपी को बस स्टैंड परिसर में एक पोल से बांधे जाने और उसकी पिटाई किए जाने का दृश्य दिखाई देता है।
पुलिस जांच के मुताबिक, मृतका काजल बरैया और फैजल पिछले करीब सात वर्षों से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे थे। पुलिस के अनुसार फैजल का आपराधिक रिकॉर्ड भी रहा है और उसके खिलाफ लूटपाट समेत कई गंभीर मामले दर्ज हैं। फैजल हाल ही में जेल से बाहर आया था। जेल से बाहर आने के बाद उसे कथित तौर पर पता चला कि काजल का उसके दोस्त रवि उर्फ बडो के साथ प्रेम संबंध चल रहा है। इसी बात को लेकर तीनों के बीच विवाद हुआ था।
पुलिस के अनुसार, गुरुवार को फैजल ने उक्त बस स्टैंड पर काजल और रवि पर हमला कर दिया। मारपीट में काजल गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना के बाद उसे तत्काल भावनगर के सरकारी सर टी. अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि, इलाज के दौरान काजल की मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और शुक्रवार को फैजल को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपी को उसी एसटी बस स्टैंड पर लेकर पहुंची थी। पुलिस वहां घटना का क्रम समझने और क्राइम सीन रीक्रिएट कराने की कार्रवाई कर रही थी। इसी दौरान आरोपी के साथ पुलिस के व्यवहार का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया गया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई पर कई सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी आरोपी से पूछताछ या क्राइम सीन रीक्रिएशन के दौरान इस तरह सार्वजनिक रूप से मारपीट की जा सकती है?
भावनगर की घटना पर इसलिए भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि गुजरात सरकार के गृह विभाग ने पुलिसकर्मियों के लिए इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
गुजरात हाईकोर्ट में स्वतः संज्ञान वाली जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान गृह विभाग की ओर से 7 मई को जारी सर्कुलर में पुलिसकर्मियों को आरोपियों के साथ सार्वजनिक जगहों पर मारपीट नहीं करने की सख्त हिदायत दी गई थी।
निर्देशों के अनुसार पुलिसकर्मी किसी आरोपी को सड़क पर डंडे से नहीं पीट सकते। इसके अलावा आरोपी को उठक-बैठक कराने या उसे रेंगने के लिए मजबूर करने जैसी कार्रवाई पर भी रोक लगाई गई है।
सरकारी निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई पुलिसकर्मी इस तरह की कार्रवाई करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। संबंधित क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने का भी प्रावधान बताया गया है।




