जामताड़ा: साइबर ठगी के लिए विश्व में नंबर वन माना जाने वाला झारखंड का जामताड़ा जिला फिर एक बार चर्चा में है। जिसका कारण है।आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना में बड़ा गड़बड़ झाला हुआ है। इस योजना के तहत 650 फर्जी सर्जरी के मामले का भंडाफोड़ हुआ है। शहर के दो निजी अस्पतालों में उपायुक्त रवि आनंद के नेतृत्व में एक विशेष टीम ने छापामारी की।जहाँ सरकारी राशि के दुरुपयोग और भारी अनियमितताओं की पुष्टि हुई है।
छापामारी टीम में जामताड़ा एसडीओ, सिविल सर्जन और बीडीओ शामिल थे। बेवा रोड स्थित सिटी अस्पताल के निरीक्षण के दौरान टीम दंग रह गई। रिकॉर्ड के अनुसार, अस्पताल ने पिछले एक महीने में आयुष्मान योजना के तहत लगभग 650 मरीजों के मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया था। लेकिन जब डीसी ने जांच की, तो परतें खुलती चली गई जिनमें बाहरी राज्यों के अधिकांश मरीज पाए गए। अस्पताल द्वारा दी गई रिपोर्ट में दर्ज अधिकांश नंबर बंद मिले। जो चालू थे, उनकी लोकेशन केरल और राजस्थान जैसे राज्यों में पाई गई। अस्पताल का न तो नक्शा स्वीकृत है और न ही वहां डॉक्टरों की संख्या है। हद तो तब हो गई जब अस्पताल परिसर में चल रही दवा दुकान के नाइसेंस तक नहीं है।
मंगलम नेत्रालय में दबिश दी। यहाँ भी आयुष्मान योजना के लाभुकों के नाम पर बड़ा खेल देखने को मिला। डीसी रवि आनंद ने बताया कि प्रथम दृष्टया यहाँ भी अधिकांश लाभार्थी दूसरे राज्यों के पाए गए हैं, और सरकारी राशि का जमकर दुरुपयोग किया गया है। उपायुक्त ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़े निर्देश दिए हैं और दोनों अस्पतालों के सभी कागजात जब्त कर लिए गए हैं। सिटी अस्पताल को सील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अस्पताल संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं डीसी रवि आनंद ने बताया कि शिकायत मिलने पर जब जांच की गई तो पता चला कि अस्पतालों द्वारा दी गई जानकारी पूरी तरह गलत थी। यह सरकारी धन की खुली लूट है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।











