नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन सरकार ने तंबाकू व पान मसाला जैसे हानिकारक उत्पादों पर कर ढांचे को पुनर्गठित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया। सोमवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, 2025 और स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025 पेश किए।
इन दोनों विधेयकों का उद्देश्य जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर के समाप्त होने के बाद भी तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों पर कर संरचना को बनाए रखना और राजस्व की भरपाई सुनिश्चित करना है।
क्या बदलने जा रहा है?
वर्तमान में सिगरेट, सिगार, हुक्का, चबाने वाले तंबाकू, जर्दा और सुगंधित तंबाकू जैसे सभी तंबाकू उत्पादों पर 28% जीएसटी के साथ-साथ क्षतिपूर्ति उपकर भी लगाया जाता है। यह उपकर जल्द ही समाप्त होने वाला है। इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने नए कर प्रावधानों का प्रस्ताव रखा है, जिनकी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, 2025
यह विधेयक जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर की जगह लेगा। सिगरेट/सिगार/चुरूट पर प्रति 1,000 स्टिक 5,000–11,000 रुपये तक नए उत्पाद शुल्क का प्रस्ताव। अनिर्मित तंबाकू पर 60–70%, और निकोटीन व इन्हेलिंग उत्पादों पर 100% उत्पाद शुल्क लगाने का प्रावधान। सरकार के मुताबिक, इसका उद्देश्य क्षतिपूर्ति उपकर के हटने के बाद भी तंबाकू पर कर संग्रह को सुरक्षित रखना है।
स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025
यह विधेयक विशेष रूप से पान मसाला के उत्पादन पर नया उपकर लगाने का प्रावधान करता है। पान मसाला पर मौजूदा 28% जीएसटी के साथ अब 40% जीएसटी + नया उपकर लागू हो सकता है। स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कारणों का हवाला देते हुए इस उपकर को पेश किया गया है।
अब कुल टैक्स कितना होगा?
क्षतिपूर्ति उपकर खत्म होने के बाद तंबाकू उत्पादों पर 40% जीएसटी + उत्पाद शुल्क और पान मसाला पर 40% जीएसटी + नया स्वास्थ्य–सुरक्षा उपकर। यानी कुल कर बोझ लगभग वही बना रहेगा, पर संरचना बदलेगी।
हालांकि सरकार ने कर ढांचे को स्थिर रखने की बात कही है, लेकिन सिगरेट और बाकी तंबाकू उत्पादों पर वास्तविक कर वृद्धि होगी या नहीं इस पर अभी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
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