
पाल महासंघ के संस्थापक अध्यक्ष ने जीवनभर किया सामाजिक समानता,शिक्षा और वंचितों के उत्थान के लिए संघर्ष
आकाश लोहार
गढ़वा
कुछ लोग दुनिया से विदा हो जाते हैं,लेकिन उनके विचार,उनके संघर्ष और समाज के प्रति उनका समर्पण लोगों के दिलों में हमेशा जीवित रहते हैं,उनका जीवन केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं होता,बल्कि वे समाज के लिए एक ऐसी विरासत छोड़ जाते हैं,जो आने वाली पीढ़ियों को भी राह दिखाती है,गढ़वा जिला पाल महासंघ के संस्थापक अध्यक्ष,लोहियावादी विचारधारा के प्रबल समर्थक और समतामूलक समाज के पक्षधर बुधन पाल का निधन ऐसी ही एक अपूरणीय क्षति है,उनके जाने से पाल समाज के साथ साथ शोषित,वंचित और कमजोर वर्गों के बीच शोक की लहर है,बुधन पाल ने बीती रात करीब एक बजे सहिजना स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली,उनके निधन की खबर से सामाजिक क्षेत्र में शोक व्याप्त हो गया,वे अपने पीछे दो पुत्र राकेश कुमार और रुपेश कुमार सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं,उनके निधन से समाज ने एक ऐसे व्यक्ति को खो दिया,जिसने अपना जीवन सामाजिक एकता,समानता और वंचितों के उत्थान के लिए समर्पित किया।
समाज को संगठित और शिक्षित करने में निभाई अहम भूमिका :- बुधन पाल अपने जीवनकाल में सामाजिक,राजनीतिक,धार्मिक और सार्वजनिक गतिविधियों में सक्रिय रहे,पाल समाज को संगठित एवं शिक्षित करने के साथ साथ समाज के पिछड़े और वंचित लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उन्होंने लगातार प्रयास किए,उनका मानना था कि समाज की वास्तविक उन्नति तभी संभव है,जब शिक्षा,सम्मान और अवसरों का लाभ हर वर्ग तक पहुंचे,लोहियावादी विचारधारा से प्रभावित बुधन पाल सामाजिक समानता और आपसी सद्भाव के पक्षधर थे,उन्होंने समाज के लोगों को एकजुट करने और सामाजिक कुरीतियों से ऊपर उठकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया,उनके सरल स्वभाव,मृदुभाषी व्यवहार और शालीन व्यक्तित्व के कारण समाज के विभिन्न वर्गों में उनकी स्वीकार्यता थी।
राष्ट्रीय जनता दल से की थी राजनीतिक जीवन की शुरुआत :- बुधन पाल ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल से की थी,राजनीति और सामाजिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी का उद्देश्य समाज के कमजोर और वंचित वर्गों की आवाज को मजबूती देना था,वे सामाजिक सरोकारों से जुड़े व्यक्ति थे और समाज के लोगों के सुख दुख में सहभागी बनने का प्रयास करते थे,पिछले कई महीनों से वे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे,आखिरकार,बीती रात उनका निधन हो गया,उनके निधन से परिवार के साथ साथ उनसे जुड़े लोगों और सामाजिक क्षेत्र में काम करने वालों को गहरा दुख पहुंचा है।
दानरो नदी के श्मशान घाट पर हुआ अंतिम संस्कार :- बुधन पाल का अंतिम संस्कार सहिजना स्थित दानरो नदी के श्मशान घाट पर किया गया,उनके ज्येष्ठ पुत्र राकेश कुमार ने मुखाग्नि दी,इस दौरान पाल समाज सहित विभिन्न सामाजिक वर्गों के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी,अंतिम संस्कार में पाल महासंघ गढ़वा के अध्यक्ष सुधीर कुमार पाल,युवा समाजसेवी राकेश पाल,डॉ. यासीन अंसारी,डॉ. मुरली प्रसाद गुप्ता,जवाहर पासवान,रंजन चौबे,अरविंद मिश्रा,दिनेश सिंह,सूरज गुप्ता,गुड्डू सिंह,पाल महासंघ के संरक्षक पारसनाथ पाल,सुखबीर पाल,सचिव रमेश पाल,कोषाध्यक्ष सुरेंद्र पाल,कृष्णा पाल,बुद्धदेव पाल,राजमोहन पाल,उदय पाल,अजय पाल,रामदेव पाल,सुमित पाल,कपिलदेव पाल,पुरनदेव पाल,विनोद पाल और रामचंद्र भगत सहित सैकड़ों लोग शामिल हुए।
युवा समाजसेवी राकेश पाल ने जताया शोक :- बुधन पाल के निधन पर सफल व्यवसायी एवं युवा समाजसेवी राकेश पाल ने गहरा शोक व्यक्त किया,उन्होंने कहा कि बुधन पाल का निधन पाल समाज के साथ साथ सामाजिक समानता और वंचितों के उत्थान के लिए काम करने वाले सभी लोगों के लिए अपूरणीय क्षति है,उनका जीवन समाज को संगठित करने,लोगों को शिक्षित करने और कमजोर वर्गों को सम्मान दिलाने के प्रयासों का प्रतीक रहा है,राकेश पाल ने कहा कि समाज के प्रति बुधन पाल का समर्पण और उनकी विचारधारा हमेशा लोगों को प्रेरित करती रहेगी,उनके द्वारा दिखाए गए सामाजिक एकता,आपसी सद्भाव और समानता के रास्ते पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी,उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति और परिजनों को इस कठिन समय में दुख सहने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।
विचारों और सेवाभाव के रूप में सदैव जीवित रहेंगे बुधन पाल :- बुधन पाल का निधन केवल एक परिवार की व्यक्तिगत क्षति नहीं,बल्कि सामाजिक क्षेत्र के लिए भी एक बड़ी क्षति है,उन्होंने अपने जीवन में समाज को जोड़ने,वंचितों की आवाज बनने और समानता पर आधारित समाज की परिकल्पना को आगे बढ़ाने का प्रयास किया,इंसान की पहचान केवल उसके जीवनकाल से नहीं,बल्कि उन विचारों और कार्यों से होती है,जिन्हें वह अपने पीछे छोड़ जाता है,बुधन पाल के सामाजिक योगदान,सरल व्यक्तित्व और सेवाभाव को लोग लंबे समय तक याद रखेंगे,उनका जाना एक ऐसी कमी छोड़ गया है,जिसे भर पाना आसान नहीं होगा।




