झारखंड को केंद्र का तोहफा, इस जिले में 1365 करोड़ रुपये की लागत से बनेगी चौथी रेलवे लाइन; होंगे इतने फायदे, झारखण्ड हिंदी न्यूज़
सरकार ने कहा, ‘प्रस्तावित परियोजनाएं कोयला, लौह अयस्क, डोलोमाइट, चूना पत्थर और जिप्सम जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण रेल मार्ग हैं। क्षमता विस्तार के बाद हर साल 44 एमटीपीए (मिलियन टन प्रति वर्ष) अतिरिक्त माल ढुलाई संभव हो सकेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीईए) की बैठक हुई, जिसमें करीब 3,907 करोड़ रुपये की दो रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इस अवधि के दौरान स्वीकृत दो परियोजनाओं में राजखरस्वान-डांगोपोसी खंड पर चौथी रेलवे लाइन का निर्माण और पारादीप-हरिदासपुर खंड का दोहरीकरण शामिल है। ये दोनों परियोजनाएं झारखंड और ओडिशा के चार जिलों में फैली हुई हैं और इन राज्यों में भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क को लगभग 145 किमी तक विस्तारित करेंगी। इनमें से राजखरसवां-डांगोपोसी परियोजना झारखंड में है.
राजखरसवां-डांगोपोसी परियोजना की विशेषताएं
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित इस परियोजना के तहत 1365 करोड़ रुपये की लागत से राजखरसवां-डांगोपोसी मार्ग पर 71 किमी लंबी चौथी लाइन का निर्माण किया जाएगा. इस दौरान इस रूट पर 5 बड़े पुल, 124 छोटे पुल और 3 आरओबी का निर्माण किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट को चार साल में पूरा करने का लक्ष्य है.
परियोजना के लाभ
- झारखंड में इस परियोजना से सारंडा-बेल्ट खदानों से इस्पात संयंत्रों तक लौह अयस्क के परिवहन की गति बढ़ जाएगी, जिससे 2030 तक भारत के 300 मीट्रिक टन इस्पात उत्पादन के लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलेगी।
- पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत हावड़ा-मुंबई ट्रंक लाइन को जोड़ने वाले कॉरिडोर पर दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में सुधार होगा।
- इससे हर साल 16.5 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की सुविधा मिलेगी।
- CO2 की बचत: हर साल 11 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन रुकेगा, जो करीब 42 लाख पेड़ लगाने के बराबर है.
- लॉजिस्टिक लागत में बचत: हर साल 235 करोड़ रुपये की बचत होगी.
- 24 लाख मानव दिवस का रोजगार सृजित होगा।
1526 गांवों तक कनेक्टिविटी सुधरेगी
केंद्र सरकार ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा, ‘प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना से लगभग 14 लाख की आबादी वाले 1,526 गांवों की कनेक्टिविटी में सुधार होगा। लाइन की क्षमता बढ़ने से गतिशीलता में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिससे भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में सुधार होगा। ये मल्टी-ट्रैकिंग (मल्टी-लाइन) परियोजनाएं परिचालन को सुव्यवस्थित करने और भीड़भाड़ के दबाव को कम करने में मदद करेंगी।
पीएम गतिशक्ति मास्टर प्लान के तहत तैयार किया गया प्लान
इसमें आगे कहा गया, ‘ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई हैं, जिसका उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के साथ बातचीत (विभिन्न हितधारकों के साथ एकीकृत योजना और बातचीत) के माध्यम से मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स क्षमता को बढ़ाना है। जिससे लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए आसान कनेक्टिविटी होगी।
प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंचना आसान हो जाएगा
सरकार ने कहा कि प्रस्तावित क्षमता विस्तार से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे ललितगिरि बौद्ध परिसर, श्री बलदेवजेव मंदिर और मेघाहातुबुरु हिल्स सहित अन्य स्थानों पर रेल कनेक्टिविटी में सुधार होगा, जिससे पर्यटन क्षेत्र को भी लाभ होगा।
