नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को एक अहम सुनवाई के दौरान देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने सख्त रुख अपनाते हुए याचिकाकर्ता के पिता को कड़ी फटकार लगाई। मामला न्यायालय के आदेश को प्रभावित करने की कथित कोशिश से जुड़ा है, जिस पर अदालत ने गंभीर नाराजगी जताई।
सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि याचिकाकर्ता के पिता ने उनके भाई को फोन कर यह पूछने की कोशिश की कि उन्होंने ऐसा आदेश क्यों दिया। इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस प्रकार का व्यवहार न्यायपालिका को प्रभावित करने का प्रयास है, जिसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि उन्हें धमकाने या दबाव बनाने की कोशिश न की जाए।
मुख्य न्यायाधीश ने कड़े लहजे में कहा कि क्या अब उन्हें आदेश देने के लिए निर्देशित किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह के दबाव के कारण वे किसी भी मामले को ट्रांसफर नहीं करेंगे। अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वे पिछले 23 वर्षों से ऐसे मामलों से निपटते आ रहे हैं।
अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि इस मामले में याचिकाकर्ता के पिता के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं थी और उन्होंने अदालत से माफी मांगी।
यह मामला उत्तर प्रदेश के सुभारती मेडिकल कॉलेज में पोस्टग्रेजुएट (PG) एडमिशन से संबंधित है। हरियाणा के दो सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों ने बौद्ध अल्पसंख्यक कोटे के तहत प्रवेश की मांग की है। उनका दावा है कि उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाया है और इसके प्रमाण भी प्रस्तुत किए हैं।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस दावे पर संदेह जता चुका है। अदालत ने संकेत दिया था कि यदि धर्म परिवर्तन केवल प्रवेश पाने के उद्देश्य से किया गया है, तो इसे धोखाधड़ी माना जा सकता है। इस संदर्भ में कोर्ट ने संबंधित राज्य सरकार से जांच रिपोर्ट भी मांगी थी।
ताजा सुनवाई में CJI ने याचिकाकर्ता के वकील को निर्देश दिया कि वे पहले तथ्यों की सत्यता की जांच करें और यदि उनका पक्ष कमजोर या गलत हो, तो याचिका वापस लेने पर विचार करें।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि मामले में हरियाणा के अधिकारियों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, जो कि न्यायिक प्रक्रिया के साथ गंभीर छेड़छाड़ है।
अंत में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई स्थगित करते हुए हरियाणा सरकार को अगली तारीख तक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही चेतावनी दी कि यदि निर्देशों का पालन नहीं किया गया, तो राज्य के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ सकता है। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की गई है।












