नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व चयनकर्ता जतिन परांजपे ने टीम इंडिया के दिग्गज विकेटकीपर-बल्लेबाज़ और पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी छोड़ने को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि 2017 में धोनी ने सीमित ओवरों की कप्तानी अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि चयनकर्ताओं के संकेत के बाद छोड़ी थी।
परांजपे ने एक क्रिकेट शो में बातचीत के दौरान बताया कि इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज से ठीक पहले चयन समिति ने धोनी से कप्तानी को लेकर चर्चा की थी। उस समय चयन समिति के अध्यक्ष एमएसके प्रसाद थे। परांजपे के मुताबिक, धोनी नेट्स में बल्लेबाजी का अभ्यास कर रहे थे, वह और एमएसके प्रसाद आपस में बात कर रहे थे कि धोनी को सम्मानजनक तरीके से यह संदेश कैसे दिया जाए कि टीम अब नई दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। इसके बाद दोनों ने धोनी से बातचीत की और कहा कि अब बदलाव का समय है। उन्होंने बताया कि धोनी ने बेहद शांत और पेशेवर अंदाज में इस सुझाव को स्वीकार किया और पूछा कि टीम को उनसे क्या चाहिए। चयनकर्ताओं ने उनसे लिखित रूप में कप्तानी छोड़ने की बात देने को कहा, जिसके बाद उसी रात धोनी का ईमेल आया कि वह सीमित ओवरों की कप्तानी छोड़ना चाहते हैं।
इसके बाद विराट कोहली के लिए टीम इंडिया की पूरी कमान संभालने का रास्ता साफ हो गया। कोहली उस समय टेस्ट टीम की कप्तानी पहले से कर रहे थे और चयनकर्ताओं की योजना तीनों फॉर्मेट में एक ही कप्तान रखने की थी। हमें इसके लिए आलोचना भी झेलनी पड़ी, लेकिन ऐसे कड़े फैसले लेने पड़ते हैं। धोनी के शांत स्वभाव और टीम फर्स्ट सोच का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने बिना किसी विवाद के बदलाव को स्वीकार किया और टीम के साथ खिलाड़ी के रूप में योगदान देते रहे। धोनी ने बतौर सीनियर खिलाड़ी टीम में अपनी भूमिका जारी रखी और 2019 विश्व कप तक भारत के लिए खेले।
महेंद्र सिंह धोनी भारत के सबसे सफल कप्तानों में गिने जाते हैं। उनकी कप्तानी में भारत ने 2007 टी20 विश्व कप, 2011 वनडे विश्व कप और 2013 चैंपियंस ट्रॉफी जीती और तीनों आईसीसी ट्रॉफियां अपने नाम करने वाले वह दुनिया के इकलौते कप्तान बने। 2014 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उन्होंने वनडे और टी20 पर ध्यान केंद्रित किया था। 4 जनवरी 2017 को इंग्लैंड सीरीज से पहले उन्होंने सीमित ओवरों की कप्तानी छोड़ दी थी।













