बारिश की बेरुखी से जिले में पिछड़ गयी रोपनी, लक्ष्य का मात्र 25% ही हुई बारिशबोकारो.
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सिटी एंकर: मानसून के समय पर नहीं आने और लंबे समय तक सक्रिय नहीं रहने का असर इस बार बोकारो जिले की खेती पर साफ दिख रहा है. जुलाई के अंतिम सप्ताह तक जिले में पिछले साल की तुलना में काफी कम बारिश रिकार्ड की गयी है. इसका सबसे बड़ा असर धान की रोपाई पर पड़ा है. कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में धान रोपनी का काम अब तक लक्ष्य का 25 प्रतिशत ही हो पाया है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गयी है. पिछले वर्ष जिले में 33 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती का लक्ष्य रखा गया था. जुलाई में इस समय तक 4,225 हेक्टेयर भूमि धान से आच्छादित हो चुकी थी। वहीं, इस साल अब तक 1,003 हेक्टेयर जमीन पर ही धान की रोपनी हो सकी है. पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण खेतों में पानी की कमी हो गयी, जिसके कारण अधिकांश किसान रोपनी शुरू नहीं कर पाये. अब किसानों को मानसून से उम्मीद है, लेकिन मौसम विभाग ने किसानों को राहत भरी खबर दी है. विभाग के मुताबिक, कुछ दिनों की ढिलाई के बाद मानसून फिर से सक्रिय हो गया है. जुलाई के आखिरी दिनों से लेकर अगस्त के पहले सप्ताह तक अच्छी बारिश की संभावना है. इस दौरान आसमान में बादल छाए रहेंगे, कई स्थानों पर गरज के साथ बारिश होगी और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की भी संभावना है. पिछले साल से इस जुलाई में बारिश 189 मिमी कम हो गई है। रोपनी जिले के सभी प्रखंडों में अब तक धान रोपनी की गति लक्ष्य से काफी पीछे है. चास प्रखंड में 7592 हेक्टेयर लक्ष्य के विरुद्ध मात्र 144 हेक्टेयर में ही रोपनी हुई है. चंदनकियारी में 5,228 हेक्टेयर लक्ष्य के विरुद्ध 130 हेक्टेयर, जरीडीह में 2,468 हेक्टेयर लक्ष्य के विरुद्ध 106 हेक्टेयर, कसमार में 2,203 हेक्टेयर लक्ष्य के विरुद्ध 111 हेक्टेयर तथा पेटरवार में 3,262 हेक्टेयर लक्ष्य के विरुद्ध 135 हेक्टेयर में धान की रोपनी हुई है. इसी तरह गोमिया में 4,964 हेक्टेयर लक्ष्य के विरुद्ध मात्र 121 हेक्टेयर भूमि, बेरमो में 641 हेक्टेयर लक्ष्य के विरुद्ध मात्र 27 हेक्टेयर भूमि, नवाडीह में 3,387 हेक्टेयर लक्ष्य के विरुद्ध मात्र 108 हेक्टेयर भूमि तथा चंद्रपुरा में 3,255 हेक्टेयर लक्ष्य के विरुद्ध मात्र 121 हेक्टेयर भूमि ही कवर की गयी है. आंकड़े बताते हैं कि जिले के अधिकांश किसान अब भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं. बारिश के आंकड़े भी खेती की मौजूदा स्थिति को स्पष्ट कर रहे हैं. पिछले साल जुलाई तक जिले में 476 मिमी बारिश दर्ज की गई थी, जबकि सामान्य लक्ष्य 286.8 मिमी था। इसके विपरीत इस वर्ष अब तक मात्र 297.6 मिमी बारिश हुई है. यानी इस बार पिछले साल की तुलना में 189 मिमी कम बारिश हुई है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की रोपाई और उत्पादन दोनों पर असर पड़ सकता है.
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