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गिरिडीह:सड़क नहीं रहने के कारण प्रसव पीड़ा से कराह रही महिला को एंबुलेंस न मिला,ग्रामीण खाट पर लादकर ले गए

On: May 28, 2026 12:57 PM
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गिरिडीह: झारखंड में विभिन्न सरकारों के दावे की पोल उसे समय खुल गई जब गिरिडीह जिले के पीरटांड़ के दालुवाडीह गांव के आजादी के लगभग 80 साल बीत जाने के बाद भी सड़क कनेक्टिविटी नहीं होने के कारण प्रसव पीड़ा से कराह रही महिला को एंबुलेंस नहीं मिला और उसे मजबूरन खाट पर लादकर ग्रामीणों के द्वारा तकरीबन 4 किलोमीटर दूर में रोड पर पहुंचाया गया जहां से उसे अस्पताल भेजा जा सका। ऐसी घटना ने लोगों को सड़क व स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को देने की सरकार की दावों के पोल खोल दी है। ग्रामीणों में अक्सर सरकार के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त रहता है।

बताया जा रहा है कि बुधवार को दालुवाडीह निवासी गर्भवती महिला सुनीता सोरेन को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने एंबुलेंस सेवा के लिए स्वास्थ्य विभाग से संपर्क किया, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस पहुंचने से मना कर दिया गया। इसके बाद ग्रामीणों और परिजनों ने महिला को खाट पर लादकर कठिन रास्तों से होते हुए पिपराडीह मुख्य सड़क तक पहुंचाया। वहां से वाहन की व्यवस्था कर उसे अस्पताल भेजा गया।

परिजनों के मुताबिक सड़क नहीं रहने के कारण महिला की हालत और गंभीर हो गई। यदि गांव तक सड़क होती तो एंबुलेंस सीधे पहुंच जाती और समय पर इलाज मिल पाता। ग्रामीणों का कहना है कि पिपराडीह तक सड़क बनी हुई है, लेकिन उसके आगे आज तक सड़क निर्माण नहीं हो पाया है, जिससे दर्जनों गांवों के लोग हर दिन परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, सड़क नहीं रहने से कुरुवारांड, दालुवाडीह, डाहिया, ईटाबेड़ा, गाड़ापरोम, सहेरबेड़ा, जिरबेड़ा, सतकटिया और बोरवाबेड़ा समेत कई गांव प्रभावित हैं। बारिश के दिनों में स्थिति और भयावह हो जाती है। बीमार, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाता है।

घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। बुधन सोरेन, सुशील मुर्मू, सानो मरांडी, गोपाल मुर्मू, सोमरा मुर्मू, पतिराम मरांडी और बाबूलाल हांसदा समेत कई ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाया। ग्रामीणों ने कहा कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद गांव की सुध लेने तक कोई नहीं आता।

ग्रामीणों ने बताया कि यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार मरीजों को खाट पर ढोकर अस्पताल पहुंचाना पड़ा है, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आज तक इस ओर नहीं गया। इस घटना ने एक बार फिर क्षेत्र की बदहाल सड़क व्यवस्था और स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल दी है।

Satish Sinha

मैं सतीश सिन्हा, बीते 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने कई अखबारों और समाचार चैनलों में रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को इमानदारी से उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले तकरीबन 6 वर्षों से मैं 'झारखंड वार्ता' से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ।

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