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पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता सुरेश कलमाड़ी का निधन, 81 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

On: January 6, 2026 10:23 AM
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पुणे: पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेश कलमाड़ी का लंबी बीमारी के बाद 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन से महाराष्ट्र की राजनीति और खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।


परिवार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, कलमाड़ी का पार्थिव शरीर आज दोपहर 2 बजे तक पुणे शहर के कलमाड़ी हाउस, एरंडवणे में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार आज ही दोपहर 3.30 बजे वैकुंठ श्मशान भूमि, नवी पेठ में किया जाएगा।


वायुसेना से राजनीति तक का सफर


सुरेश कलमाड़ी को केवल एक राजनेता के तौर पर नहीं, बल्कि पुणे की राजनीति के ‘किंगमेकर’ के रूप में भी जाना जाता था। राजनीति में आने से पहले उन्होंने भारतीय वायुसेना में पायलट के रूप में देश की सेवा की। इसके बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और अपनी अलग पहचान बनाई।


कलमाड़ी कई बार पुणे से लोकसभा सांसद चुने गए और केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में भी कार्य किया। उनके कार्यकाल के दौरान पुणे में शहरी विकास, बुनियादी ढांचे और कई जनकल्याणकारी योजनाओं को गति मिली, जिनका असर आज भी शहर में देखा जा सकता है।


शरद पवार के साथ राजनीतिक मोड़


सुरेश कलमाड़ी का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा। वह लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़े रहे, लेकिन जब शरद पवार ने कांग्रेस से अलग होकर नई पार्टी बनाने का ऐलान किया, तब कलमाड़ी भी उनके साथ हो गए। पवार ने उन्हें अपनी पार्टी की युवा इकाई का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया। यही नहीं, शरद पवार ने ही कलमाड़ी को 1982 में पहली बार राज्यसभा भेजा था। हालांकि, बाद के वर्षों में कलमाड़ी ने दोबारा कांग्रेस का दामन थाम लिया।


खेल प्रशासन में अहम भूमिका


दिलचस्प बात यह रही कि खेलों से सीधा नाता न होने के बावजूद सुरेश कलमाड़ी भारतीय खेल प्रशासन के बड़े चेहरों में शामिल हो गए। वे पहले एथलेटिक्स फेडरेशन के प्रमुख बने और फिर भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) से जुड़ गए। IOA के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने लंबे समय तक भारतीय खेलों की कमान संभाली।
उनके करियर का सबसे अहम पड़ाव 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स रहा, जिसे एक मील का पत्थर माना जाता है। हालांकि, इसी आयोजन के दौरान उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे। इस मामले में उन्हें जेल भी जाना पड़ा और कांग्रेस पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया था। विवादों के बावजूद खेलों के क्षेत्र में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाता रहा।


सुरेश कलमाड़ी के निधन के साथ ही पुणे और देश की राजनीति का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया। समर्थक उन्हें एक कुशल रणनीतिकार और प्रभावशाली नेता के रूप में याद कर रहे हैं, वहीं आलोचक उनके विवादित दौर को भी याद करते हैं। बावजूद इसके, पुणे के विकास और भारतीय खेल प्रशासन में उनकी भूमिका को लंबे समय तक याद किया जाता रहेगा।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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