रांची : पेसा (पंचायत उपबंध अनुसूचित क्षेत्र) नियमावली को लेकर राजी पाड़हा सरना प्रार्थना सभा, भारत ने अपना स्पष्ट रुख सामने रखा है। सभा के केंद्रीय प्रवक्ता संजय पाहन ने पेसा नियमावली को आदिवासी स्वशासन, जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा और ग्रामसभा के अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है। संजय पाहन ने कहा कि पेसा कानून का मूल उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समाज को उनकी पारंपरिक व्यवस्था, संस्कृति और संसाधनों पर संवैधानिक अधिकार देना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि पेसा नियमावली को उसकी मूल भावना के अनुरूप ईमानदारी से लागू किया गया, तो यह आदिवासी समाज के लिए सशक्तिकरण का मजबूत आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि न लोकसभा न विधानसभा सबसे बड़ी ग्राम सभा है इसलिए ग्रामसभा को सर्वोच्च इकाई मानते हुए उसके निर्णयों का सम्मान किया जाना चाहिए।
जल, जंगल, जमीन, खनिज संसाधन, स्थानीय बाजार, शराब बिक्री, भूमि अधिग्रहण और विकास योजनाओं में ग्रामसभा की सहमति अनिवार्य हो, यही पेसा की आत्मा है। केंद्रीय प्रवक्ता ने सरकार को आगाह करते हुए कहा कि पेसा नियमावली को कमजोर करने, अधिकारियों के हाथ में केंद्रित करने या आदिवासी परंपराओं की अनदेखी करने का कोई भी प्रयास स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अविलंब ड्राफ्ट को सरकार सार्वजनिक करें। राजी पाड़हा सरना प्रार्थना सभा इस पर सतत निगरानी रखेगी।संजय पाहन ने यह भी कहा कि सरना धर्म, आदिवासी अस्मिता और पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था की रक्षा के लिए पेसा नियमावली का सही क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अंत में कहा कि “पेसा केवल एक कानून नहीं, बल्कि आदिवासी स्वाभिमान और स्वशासन की पहचान है। इसे कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत किया जाना चाहिए।














