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Hartalika Teej 2025: हरतालिका तीज आज, जानें महत्व, पूजा विधि और पूजन का सही मुहूर्त

On: August 26, 2025 7:13 AM
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Hartalika Teej 2025: आज देशभर में हरतालिका तीज का पर्व बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में यह व्रत विशेष महत्व रखता है। उत्तर भारत के कई राज्यों—राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड में इसे हरतालिका तीज के रूप में मनाया जाता है, जबकि दक्षिण भारत में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में यह पर्व गौरी हब्बा के नाम से प्रसिद्ध है। यहां महिलाएं स्वर्ण गौरी व्रत रखकर देवी गौरी की पूजा करती हैं।

भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को होता है व्रत

हिंदू पंचांग के अनुसार, हरतालिका तीज का पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस बार तीज की तिथि 25 अगस्त को दोपहर 12:34 बजे शुरू हुई थी और 26 अगस्त को दोपहर 1:54 बजे समाप्त हो रही है। उदयातिथि के अनुसार व्रत 26 अगस्त को ही रखा जा रहा है।

व्रत और पूजन का शुभ मुहूर्त

आज हरतालिका तीज के पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 5:56 बजे से 8:31 बजे तक रहा, जो कुल 2 घंटे 35 मिनट तक चला। इसके अलावा महिलाएं अभिजीत मुहूर्त (11:57 बजे से 12:48 बजे तक) और विजय मुहूर्त (2:31 बजे से 3:23 बजे तक) में भी पूजन कर सकती हैं। व्रत का पारण 27 अगस्त की सुबह 5:57 बजे किया जाएगा।

निर्जला व्रत का महत्व

हरतालिका तीज का व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। इसे करने वाली महिलाएं 24 घंटे तक बिना अन्न और जल के रहती हैं। विवाहित महिलाएं यह व्रत अपने पति की लंबी आयु और वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि के लिए करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं मनचाहे वर की प्राप्ति की कामना से इस व्रत का पालन करती हैं।

पूजा विधि और सामग्री

सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की मिट्टी की मूर्तियां बनाकर स्थापित करती हैं। पूजा में फूल, फल, धूप, दीप, नैवेद्य, पीले वस्त्र, केले का पत्ता, रोली, जनेऊ, सुपारी, शमी पत्र, बेलपत्र, कलश, अक्षत, दूर्वा, घी, कपूर, दही और गंगाजल का उपयोग किया जाता है।

माता पार्वती के श्रृंगार के लिए सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, मेहंदी और कुमकुम जैसी सामग्री अर्पित की जाती है। महिलाएं दिनभर उपवास रखकर सुबह और शाम भगवान शिव-पार्वती की पूजा करती हैं और व्रत कथा सुनती हैं।

शिव-पार्वती विवाह की कथा से जुड़ा है पर्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, हरतालिका तीज का व्रत माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए रखा था। इसी दिन माता पार्वती ने कठोर तपस्या कर शिवजी को प्रसन्न किया और उनके साथ विवाह का संकल्प पूरा हुआ। इसी कारण यह व्रत महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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