
मेदिनीनगर/जमशेदपुर: झारखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। पलामू और पूर्वी सिंहभूम में नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है, जिससे कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। मेदिनीनगर और जमशेदपुर के निचले इलाकों में पानी घुसने से सैकड़ों घर जलमग्न हो गए हैं और लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ है।
पलामू जिले के मुख्यालय मेदिनीनगर स्थित कंडू मोहल्ले में शुक्रवार सुबह उत्तरी कोयल नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से बाढ़ का पानी रिहायशी इलाके में प्रवेश कर गया। देखते ही देखते 200 से अधिक घर पानी में डूब गए और कई सड़कों पर भी जलभराव हो गया। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
अचानक आई बाढ़ के कारण आवागमन भी प्रभावित हुआ। कई रास्तों पर पानी भर जाने से लोगों की आवाजाही बाधित रही। जिला प्रशासन ने हालात पर लगातार नजर बनाए रखी है और राहत एवं बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं।
दरअसल, उत्तरी कोयल नदी में गुमला लोहरदगा एवं सिमडेगा के इलाके से पानी आता है। गुमला, लोहरदगा और सिमडेगा के इलाके में लगातार बारिश होने के बाद शुक्रवार को पलामू में उत्तरी कोयल नदी पूरी तरह से उफान पर है। नदी 10 साल बाद इस तरह उफान पर है। नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है।
पलामू के उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने बताया कि इस मानसून में पहली बार इस तरह की अचानक बाढ़ देखने को मिली है। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित अधिकारियों को अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया गया है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों के आसपास जाने से बचें। प्रशासन को उम्मीद है कि दिन चढ़ने के साथ जलस्तर में कुछ कमी आ सकती है।
वहीं, पूर्वी सिंहभूम जिले के जमशेदपुर में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। गुरुवार रात से लगातार बारिश के कारण खरकई और स्वर्णरेखा नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। नदी का पानी निचले इलाकों में पहुंचने लगा है, जिससे कई बस्तियों में जलभराव की स्थिति बन गई है।
पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त राजीव रंजन ने बताया कि जिला प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर रखे हुए है। जलग्रहण क्षेत्र और नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क कर दिया गया है तथा जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की तैयारी की गई है।






