
जमशेदपुर: क्या किसी ने सोचा था कि सड़क किनारे लावारिस पड़ा कचरे का एक ढेर और एक पुराना सड़ा टायर चंद पलों में करोड़ों के कारोबार और कई परिवारों की रोजी-रोटी को निगल जाएगा? गोलमुरी स्थित प्रसिद्ध रघुवर मार्केट से सामने आई इस रूह कंपा देने वाली तस्वीर ने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है। शनिवार का वो खौफनाक मंजर, जिसने हंसते-खेलते बाजार को देखते ही देखते धुएं और राख के समंदर में बदल दिया, अब कई सवाल खड़े कर रहा है।
साजिश, लापरवाही या महज एक इत्तेफाक?
चश्मदीदों के रोंगटे खड़े कर देने वाले बयानों पर गौर करें तो कहानी की शुरुआत मार्केट परिसर के उस कोने से हुई जहां कूड़े का अंबार लगा था। उसी कचरे के सीने में दबा था एक पुराना टायर—जो चंद मिनटों बाद एक ‘अग्नि बम’ साबित हुआ। अचानक भड़की एक रहस्यमयी चिंगारी ने जैसे ही टायर को अपनी गिरफ्त में लिया, आसमान को छूती काली लपटों ने रघुवर मार्केट को अपनी आगोश में समेटना शुरू कर दिया।
चीख-पुकार, बेबसी और 15 लाख का खाक होता वजूद
धुएं का काला गुबार इतना घना था कि दिन के उजाले में भी अंधेरा छा गया। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे थे, तो दुकानदार अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई को आंखों के सामने जलता देख बेबस आंसुओं के साथ पानी फेंक रहे थे। मगर उस ‘आग के शैतान’ के आगे बाल्टियों का पानी बेअसर साबित हुआ। देखते ही देखते चार दुकानें जिंदा श्मशान बन गईं। कपड़ों से लेकर काउंटर तक, सब कुछ सेकंडों में कोयला हो गया। पीड़ितों की मानें तो इस तबाही में 10 से 15 लाख का सामान पलक झपकते ही मिट्टी में मिल चुका है।
दमकल की सायरन और वो सवाल जो अब भी सुलग रहे हैं
जब स्थानीय लोगों की हर कोशिश नाकाम हो गई, तब कांपते हाथों से फायर ब्रिगेड को इमरजेंसी कॉल खटखटाया गया। दमकल गाड़ियों के सायरन से पूरा गोलमुरी गूंज उठा। राहत दल ने मोर्चा तो संभाला, लेकिन तब तक व्यापारियों के सपने राख के ढेर में तब्दील हो चुके थे।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर उस कचरे में आग कैसे लगी? क्या यह किसी की सुलगती बीड़ी की लापरवाही थी या फिर भीड़भाड़ वाले रघुवर मार्केट को दहलाने की कोई सोची-समझी साजिश? प्रशासन अब इस खौफनाक हादसे की तह तक जाने की तैयारी में जुटा है।




