Masood Azhar: आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर का पाकिस्तान से जारी किया गया एक ऑडियो संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस ऑडियो में मसूद अजहर अपने संगठन की ताकत का दावा करते हुए कहता है कि जैश के पास बड़ी संख्या में आत्मघाती हमलावर मौजूद हैं, जो किसी भी समय हमले को अंजाम देने के लिए तैयार हैं। हालांकि, इस ऑडियो के जारी होने की तारीख और समय की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है।
यह ऑडियो ऐसे वक्त सामने आया है, जब हाल ही में भारत ने पाकिस्तान में मौजूद जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े ठिकानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की थी। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह ऑडियो उसी कार्रवाई के बाद दबाव और डर का माहौल बनाने की कोशिश हो सकता है।
ऑडियो क्लिप में मसूद अजहर अपने समर्थकों को उकसाने की कोशिश करता हुआ नजर आता है। वह दावा करता है कि उसके संगठन में शामिल आतंकी केवल शहादत की चाह रखते हैं और किसी भी सांसारिक इच्छा की बात नहीं करते। मसूद अजहर की आवाज में साफ तौर पर उग्रवाद को बढ़ावा देने वाला संदेश सुना जा सकता है।
मसूद अजहर ऑडियो में कहता है कि उसके संगठन में ऐसे लोग मौजूद हैं जो रात के वक्त केवल शहादत की दुआ मांगते हैं। वह यह भी दावा करता है कि उसके पास मौजूद आतंकियों की संख्या इतनी अधिक है कि अगर पूरी तादाद सार्वजनिक कर दी जाए तो अंतरराष्ट्रीय मीडिया में हलचल मच जाएगी। ऑडियो में मसूद अजहर कहता है- ‘ये एक नहीं, दो नहीं, सौ नहीं, ये हजार भी नहीं हैं अगर पूरी तादाद बता दूं, तो कल दुनिया की मीडिया में शोर मच जाएगा।’
ऑडियो में मसूद अजहर यह भी कहता है कि आतंकी उसे लगातार संदेश भेजकर जल्द आगे भेजने की मांग करते हैं और इसके लिए तरह-तरह के बहाने और भावनात्मक अपील करते हैं। पूरे संदेश में वह धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल कर अपने समर्थकों को हिंसा के लिए प्रेरित करता दिखाई देता है।
गौरतलब है कि मसूद अजहर को भारत, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र द्वारा ग्लोबल आतंकी घोषित किया जा चुका है। पठानकोट एयरबेस हमला, पुलवामा आतंकी हमला सहित भारत में हुए कई बड़े आतंकी हमलों में उसका नाम सामने आ चुका है। इसके बावजूद पाकिस्तान में उसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई न होना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवालों के घेरे में रहा है।
सुरक्षा एजेंसियां वायरल ऑडियो की प्रामाणिकता की जांच में जुटी हैं और इसे आतंकी संगठन की मनोवैज्ञानिक युद्ध की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के संदेशों का मकसद डर फैलाना, समर्थकों को सक्रिय रखना और सुरक्षा एजेंसियों पर दबाव बनाना होता है।














