

धनबाद: जिले के डिगवाडीह स्थित कार्मेल स्कूल में कथित रूप से पेन डे मनाने पर पर प्रिंसिपल के द्वारा इसे अनुशासनहीनता का मामला बताते हुए छात्राओं की शर्ट उतरवाने का आरोप लगा है। इसके खिलाफ छात्राओं ने अपने परिजनों से शिकायत की और परिजन स्कूल पहुंच गए। मामला जिला उपायुक्त कार्यालय तक पहुंचा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। उपायुक्त ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक कमेटी गठित की है।उन्होंने कहा कि टीम स्कूल जाकर सभी पक्षों की जांच करेगी और जरूरत पड़ने पर एफआईआर दर्ज कर दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी। उनका कहना है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।
वहीं दूसरी ओर झरिया विधायक रागिनी सिंह ने कहना है कि प्रिंसिपल खुद एक महिला है और महिला के साथ ऐसी घटना बेहद ही शर्मनाक है। उपायुक्त से बात करने के बाद हमें आश्वासन दिया गया है और हमें विश्वास है की कार्रवाई भी की जाएगी ऐसे प्रिंसिपल को जल्द से जल्द अपने पोस्ट से हटना चाहिए।
बता दे कि 9 जनवरी को यह घटना हुई।इस शर्मनाक घटना से पूरे क्षेत्र में आक्रोश व्याप्त है।
बताया जा रहा है कि दसवीं कक्षा की छात्राओं द्वारा स्कूल के आखिरी दिन “पेन डे” मनाने पर प्रिंसिपल ने इसे अनुशासनहीनता करार देते हुए छात्राओं की शर्ट उतरवा दी। इस अमानवीय व्यवहार से छात्राएं बेहद असहज हो गईं और रोते हुए अपने परिजनों को बुलाया।
इस घटना के विरोध में शनिवार को बड़ी संख्या में छात्राओं के परिजन उपियुक्त कार्यालय पहुंचे और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। परिजनों ने बताया कि यह घटना न केवल अनुचित है बल्कि मानसिक रूप से बच्चों पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि शर्ट उतरवाने की कार्रवाई के दौरान स्कूल में कुछ पुरुष शिक्षक भी मौजूद थे, जिससे बच्चियां और अधिक असहज हो गईं।
छात्राओं के परिजनों ने कहा कि दसवीं कक्षा की बच्चियों के साथ ऐसा व्यवहार अस्वीकार्य है। उन्होंने बताया कि पेन डे एक परंपरा है, जिसमें बच्चे अपने सहपाठियों की यादें संजोते हैं। परंतु प्रिंसिपल द्वारा इस प्रकार की कार्रवाई न केवल अनुचित है बल्कि शर्मनाक भी है। परिजनों ने मांग की है कि प्रिंसिपल को तुरंत निलंबित कर गिरफ्तार किया जाए और दोषी शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
बोर्ड परीक्षा नजदीक होने के कारण इस घटना से बच्चों पर मानसिक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। परिजनों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से बच्चों का आत्मविश्वास कमजोर होता है और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।
संबंधित समाचार
Akash Lohra
September 22, 2026
Akash Lohra
September 22, 2026






