
जमशेदपुर। लौहनगरी के डिमना में प्रस्तावित अंतर्राज्यीय बस टर्मिनल की 13 एकड़ जमीन पर सुलग रहा ‘कचरा विवाद’ अब प्रशासनिक दांव-पेंच से निकलकर सड़क से अदालत तक की खुली जंग में तब्दील हो चुका है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की सख्ती के बावजूद जांच टीम का मौके पर न पहुंचना सिस्टम की कार्यशैली पर गहरे सवाल खड़े कर रहा है। 7 अक्टूबर को अधिकरण द्वारा दी गई 14 दिनों की डेडलाइन चुपचाप बीत गई, लेकिन न तो जांच दल जमीन पर उतरा और न ही कागजों में कोई हलचल दिखी।
इधर मौका मुआयना टलने के बीच स्थानीय निवासियों ने गंभीर आरोप जड़े हैं कि जांच से पहले ही साक्ष्यों को मिटाने की होड़ मची है—कचरे के बड़े अंबार को उसी जमीन में गाड़कर समतल किया जा रहा है और बाउंड्रीवॉल का हिस्सा तक तोड़ दिया गया।
कागजों में दबा NGT का आदेश, खामोश बैठे रहे अफसर
एनजीटी की पूर्वी क्षेत्र पीठ (कोलकाता) ने 23 सितंबर को कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद (SPCB) और जिला दंडाधिकारी की एक संयुक्त समिति को दो सप्ताह के भीतर आवेदक के साथ मुआयना करने का फरमान सुनाया था।
मामले को कानूनी दहलीज तक ले जाने वाले जन विकास मंच के अध्यक्ष सौरभ विष्णु ने प्रशासन को घेरा। उन्होंने बताया कि 3 और 5 अक्टूबर को रांची से लेकर जमशेदपुर तक के दफ्तरों में लिखित रिमाइंडर भेजे गए, लेकिन अफसरों ने चुप्पी साधे रखी। अब आवेदक इसी प्रशासनिक सुस्ती, समय-सीमा के उल्लंघन और जमीन की शक्ल बदलने के वीडियो सबूतों के साथ अधिकरण में दोबारा दस्तक देने की तैयारी में हैं।
वसुंधरा एस्टेट से डिमना बस्ती तक: आंदोलन बना जनसैलाब
प्रशासन की कथित अनदेखी ने आंदोलन की आग में घी डालने का काम किया है। जो लड़ाई कल तक सिर्फ वसुंधरा एस्टेट तक सीमित दिख रही थी, वह अब हाईवे की पूरी पट्टी पर फैल चुकी है:
नए मोर्चे का गठन: वसुंधरा एस्टेट विकास समिति का दायरा बढ़ाते हुए अब ‘डिमना–पारडीह चौक विकास समिति’ का ऐलान कर दिया गया है।
बस्तियों की एकजुटता: डिमना बस्ती, हिल विहार, रेबिट कॉलोनी समेत एनएच-33 किनारे बसी तमाम कॉलोनियां अब एक बैनर तले आ गई हैं।
हस्ताक्षर अभियान व धरना: वार्ड पार्षद बापी दास के समर्थन के बाद डिमना बस्ती में बड़े पैमाने पर हस्ताक्षर अभियान छेड़ा गया है।
समिति ने साफ कर दिया है कि वे नगर निगम को लिखित आपत्ति दर्ज करा रहे हैं—किसी भी सूरत में इस जमीन या हाईवे किनारे रिहायशी आबादी के पास कचरा शेड या कॉम्पैक्टर मशीन बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
“कल तक हम रहम और कार्रवाई की मांग कर रहे थे, लेकिन अब सवाल कानून के इकबाल का है। बदबू और गंदा पानी किसी सोसाइटी या बस्ती का फर्क नहीं पहचानते। अधिकरण का आदेश हमारे हाथ में है और जनता हमारे साथ—यह लड़ाई अब आर-पार की होगी।”





