July 26, 2026

झारखंड पुलिस को मिली बड़ी सफलता, पकड़ा गया मिसिर बेसरा का खास अजय महतो; 25 लाख का था इनाम, झारखंड हिंदी न्यूज़

झारखंड पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. गिरिडीह पुलिस ने गुरुवार की देर रात प्रतिबंधित भाकपा माओवादी संगठन के 25 लाख रुपये के इनामी नक्सली अजय महतो उर्फ ​​टाइगर उर्फ ​​बासुदेव को गिरफ्तार कर लिया. मिसिर बेसरा के लिए अजय बेहद खास थे.

झारखंड पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. गिरिडीह पुलिस ने गुरुवार की देर रात प्रतिबंधित भाकपा माओवादी संगठन के 25 लाख रुपये के इनामी नक्सली अजय महतो उर्फ ​​टाइगर उर्फ ​​बासुदेव को गिरफ्तार कर लिया. संगठन की स्पेशल एरिया कमेटी (एसएसी) का सदस्य अजय महतो लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ था. अजय को हरलाडीह इलाके से पकड़ा गया. उसके साथ दो अन्य नक्सली भी गिरफ्तार किये गये हैं. गिरफ्तारी के दौरान अजय के पास से हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया गया. मिली जानकारी के अनुसार अजय महतो कुख्यात मिसिर बेसरा के सबसे खास सहयोगियों में से एक था.

कैसे पकड़ा गया कुख्यात अजय महतो?

गिरिडीह एसपी डॉ. बिमल कुमार को कुख्यात अजय महतो के इलाके में रहने की सूचना मिली थी. इस सूचना पर तत्काल एक विशेष टीम का गठन किया गया. टीम ने अजय को करमू के घर से पकड़ लिया, जहां वह छिपा हुआ था. पुलिस अजय महतो से लंबी पूछताछ करेगी. फिलहाल इस मामले में गिरिडीह पुलिस कुछ नहीं बता रही है. एसपी डॉ. बिमल कुमार का कहना है कि फिलहाल नक्सलियों के खिलाफ अभियान जारी है। अब पुलिस मिसिर बेसरा की तलाश कर रही है. मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद झारखंड में नक्सलियों का सफाया हो जायेगा.

अजय मिसिर बेसरा के करीबी माने जाते हैं

अजय महतो पीरटांड़ के नावाडीह का रहने वाला है. अजय अपने संगठन के शीर्ष माओवादी नेता और एक करोड़ रुपये के इनामी मिसिर बेसरा का काफी करीबी माना जाता है. अजय के खिलाफ झारखंड समेत अन्य राज्यों में पुलिस पर हमला, आईईडी ब्लास्ट, रंगदारी, रंगदारी आदि से जुड़े 240 से ज्यादा मामले दर्ज हैं. अजय के खिलाफ न सिर्फ झारखंड बल्कि बिहार, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा में भी कई मामले दर्ज हैं. कई राज्यों की पुलिस भी अजय महतो की तलाश कर रही थी.

पीसी शर्मा हत्याकांड के बाद चर्चा में आए थे

2012 में मधुबन स्थित दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी के तत्कालीन महाप्रबंधक पीसी शर्मा की हत्या के चर्चित मामले में भी अजय का नाम आया था.

सिर्फ दो बड़े माओवादी बचे

संगठन की गतिविधियों के संचालन और लेवी नेटवर्क को मजबूत करने में उसकी अहम भूमिका बताई जा रही है. उसने पिछले तीन दशक से इलाके में आतंक फैला रखा है. चाहे पारसनाथ क्षेत्र हो या सारंडा, छत्तीसगढ़ हो, ओडिशा हो या बिहार, हर जगह नक्सली घटनाओं और पुलिस मुठभेड़ों में इसका नाम आता रहा है. कई हत्या के मामलों में भी इसका नाम सामने आ चुका है.

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