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सीएम हेमंत के दिल्ली दौरे से झारखंड की सियासत गरम,राज्यसभा चुनाव के बाद होगा खेला!

On: June 13, 2026 2:04 PM
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रांची:मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का दिल्ली दौरा इन दिनों झारखंड की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। राज्यसभा चुनाव के माहौल में उनकी राजधानी से दूरी को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि मुख्यमंत्री अब झारखंड लौट आए हैं। खासकर भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के मैदान में उतरने के बाद महागठबंधन के भीतर वोटों के गणित और संभावित राजनीतिक हलचलों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान विधायकों को एकजुट रखना सभी दलों के लिए बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में मुख्यमंत्री के दिल्ली प्रवास ने सहयोगी दलों, विशेषकर कांग्रेस के कुछ नेताओं की चिंता बढ़ा दी है। कांग्रेस खेमे में यह आशंका जताई जा रही है कि चुनाव के समय यदि शीर्ष नेतृत्व राज्य से बाहर रहता है तो विपक्षी रणनीतियों को बल मिल सकता है।
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग मानता है कि मुख्यमंत्री की प्राथमिकताएं केवल राज्यसभा चुनाव तक सीमित नहीं हैं। हाल के दिनों में केंद्रीय एजेंसियों की जांच और विभिन्न कानूनी मामलों ने भी सरकार और मुख्यमंत्री की राजनीतिक व्यस्तताओं को बढ़ाया है। इसी कारण दिल्ली दौरे को लेकर कई तरह के राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं।
इस बीच जमीन से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच और अदालत की हालिया कार्यवाही ने भी मुख्यमंत्री की मुश्किलें बढ़ाई हैं। जांच एजेंसियां रांची और साहिबगंज से जुड़े कुछ मामलों की पड़ताल कर रही हैं, जिनमें पहले से कई लोगों से पूछताछ और कार्रवाई हो चुकी है।
दूसरी ओर, कांग्रेस नेताओं की चिंता का केंद्र राज्यसभा चुनाव का गणित है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी के चुनावी अनुभव और राजनीतिक संपर्कों को देखते हुए महागठबंधन अपने विधायकों की एकजुटता बनाए रखने पर विशेष ध्यान दे रहा है। इसी वजह से मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और भी तेज हो गई हैं।
फिलहाल, हेमंत सोरेन के दिल्ली दौरे के वास्तविक उद्देश्य को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन राज्यसभा चुनाव और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई के बीच यह दौरा झारखंड की राजनीति में कई सवाल जरूर खड़े कर रहा है। क्या उथल-पुथल के लिए विख्यात झारखंड प्रदेश फिर एक नई राजनीति का इतिहास रच सकती है!

Satish Sinha

मैं सतीश सिन्हा, बीते 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने कई अखबारों और समाचार चैनलों में रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को इमानदारी से उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले तकरीबन 6 वर्षों से मैं 'झारखंड वार्ता' से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ।

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