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रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ी और धांधली के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, परीक्षा माफिया के संगठित नेटवर्क को लेकर नए और गंभीर तथ्य सामने आ रहे हैं। सीआईडी की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी बुद्धेश्वर भगत से मिली जानकारी के आधार पर जांच एजेंसी अब इस पूरे रैकेट की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
शुरुआती जांच में एक ऐसे कथित सिंडिकेट का पता चला है, जो अभ्यर्थियों को प्रारंभिक परीक्षा से लेकर अंतिम चयन तक पहुंचाने के नाम पर बड़ी रकम वसूलने की तैयारी में था। जांच में करीब 100 करोड़ रुपये की अवैध उगाही के संभावित नेटवर्क का खाका सामने आने की बात कही जा रही है।
श्रेणी के हिसाब से तय था रेट कार्ड
जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, कथित सिंडिकेट ने अभ्यर्थियों के लिए अलग-अलग श्रेणियों के आधार पर रकम निर्धारित कर रखी थी। सामान्य और ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों के अंतिम चयन के लिए कथित तौर पर एक करोड़ रुपये, जबकि एससी और एसटी वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 80 लाख रुपये तक की राशि तय होने की जानकारी सामने आई है।
वहीं, अभ्यर्थियों को इस नेटवर्क तक पहुंचाने वाले कथित दलालों और एजेंटों के लिए प्रति अभ्यर्थी 15 लाख रुपये कमीशन निर्धारित किए जाने की बात जांच में सामने आई है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस रकम का वास्तविक लेन-देन किसके माध्यम से और किन लोगों के बीच होना था।
पीटी से लेकर अंतिम चयन तक किस्तों में वसूली की तैयारी
सीआईडी की पूछताछ में कथित तौर पर एक चरणबद्ध भुगतान मॉडल की जानकारी भी सामने आई है। इसके तहत प्रारंभिक परीक्षा यानी पीटी के नाम पर अभ्यर्थियों से 10 लाख रुपये एडवांस लेने की योजना थी।
पीटी में सफलता के बाद रकम की अगली किस्त वसूले जाने की बात सामने आई है। इसके बाद मुख्य परीक्षा तक कुल तय रकम का करीब 50 फीसदी हिस्सा लेने का कथित प्लान था। बची हुई रकम अंतिम चयन सूची में अभ्यर्थी का नाम आने के बाद लेने की तैयारी थी।
इससे जांच एजेंसी को आशंका है कि कथित नेटवर्क केवल परीक्षा के किसी एक चरण तक सीमित नहीं था, बल्कि प्रारंभिक परीक्षा से लेकर अंतिम चयन तक पूरी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी।
आयोग के अंदर-बाहर गठजोड़ की जांच
बुद्धेश्वर भगत से पूछताछ के बाद मिले सुरागों के आधार पर सीआईडी अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। जांच के दायरे में आयोग से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी, बाहरी बिचौलिये, कथित एजेंट और अन्य संदिग्ध लोग शामिल हैं।
सीआईडी ने JPSC कार्यालय समेत कई संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी कर दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए हैं। इन सामग्रियों के जरिए कथित वित्तीय लेन-देन, संपर्कों और परीक्षा प्रक्रिया में संभावित मिलीभगत से जुड़े साक्ष्य जुटाने की कोशिश की जा रही है।
जांच एजेंसी अब पूछताछ में सामने आए दावों को डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों से मिलाने में जुटी है। कथित लेन-देन, मोबाइल संपर्क, डिजिटल डाटा और जब्त दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रैकेट का वास्तविक नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
जांच अधिकारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कथित सिंडिकेट केवल अभ्यर्थियों से पैसे वसूलने की योजना बना रहा था या परीक्षा प्रक्रिया में वास्तविक स्तर पर भी किसी तरह की अनियमितता की गई।
अभ्यर्थियों के आंदोलन के बीच जांच से बढ़ी उम्मीद
राजधानी रांची में परीक्षा की पारदर्शिता और कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर अभ्यर्थी लगातार आवाज उठाते रहे हैं। ऐसे में सीआईडी जांच में सामने आ रही कथित जानकारियों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
अब जांच की दिशा कथित परीक्षा माफिया से आगे बढ़कर उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश में है, जिनके संरक्षण या सहयोग के बिना इतने बड़े नेटवर्क के संचालन की आशंका जताई जा रही है।
हालांकि, जांच एजेंसी के सामने आए बयान और दावे अभी जांच का हिस्सा हैं। इनकी पुष्टि तकनीकी, डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर की जानी बाकी है। इसलिए कथित रेट कार्ड, करोड़ों रुपये की उगाही की योजना और अन्य आरोपों को जांच पूरी होने तक अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। जांच पूरी होने के बाद ही मामले में वास्तविक स्थिति और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।





