
कोडरमा: कोडरमा जिले के प्रशासनिक और स्वास्थ्य महकमे में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की कमान संभाल रहे सबसे बड़े अधिकारी कानूनी शिकंजे में आ गए। 16 साल की एक नाबालिग द्वारा लगाए गए बेहद संगीन आरोपों के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कोडरमा के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। कागजी और कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत के तहत जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया गया है।
इलाज के बहाने संपर्क, फिर लगे गंभीर आरोप
सूत्रों और दर्ज मामले के मुताबिक, पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब पड़ोसी जिले हजारीबाग की रहने वाली और बरही इलाके में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही एक छात्रा इलाज कराने के सिलसिले में स्वास्थ्य अधिकारी के संपर्क में आई। आरोप है कि इसी दौरान प्रभाव और झांसे का खेल चला, जिसके बाद नाबालिग ने सिविल सर्जन पर गंभीर शोषण का आरोप मढ़ दिया। मामला सामने आते ही जिले के आला अधिकारियों के कान खड़े हो गए।
महिला थाने में शिकायत के बाद एक्शन मोड में पुलिस
छात्रा की शिकायत को आधार बनाते हुए कोडरमा महिला थाना पुलिस ने बिना देर किए मामला दर्ज किया और सीधे कार्रवाई की राह चुनी। आरोपी डॉक्टर को हिरासत में लेकर पहले लंबी पूछताछ की गई, फिर तय प्रोटोकॉल के तहत उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया। इसके बाद उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से सीधे जेल भेजने का फरमान जारी हुआ।
जांच जारी, अदालत के फैसले पर टिकी नजरें
जिले के इतने बड़े पद पर बैठे अधिकारी पर लगे इन आरोपों ने पूरे सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर दिया है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की कड़ियों को बारीकी से जोड़ा जा रहा है और तकनीकी व चिकित्सीय साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। इन आरोपों में कितनी सच्चाई है, इसका अंतिम फैसला न्यायिक जांच और अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आ पाएगा। फिलहाल कानूनी रूप से आरोपों की पुष्टि होना बाकी है।



