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रांची: जज से नोक-झोंक मामले में वकील महेश तिवारी ने मांगी माफी, फैसला सुरक्षित

On: February 10, 2026 1:16 PM
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रांची: झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस राजेश कुमार के साथ हुई तीखी नोक-झोंक के मामले में आपराधिक अवमानना का सामना कर रहे अधिवक्ता महेश तिवारी ने कोर्ट के समक्ष बिना शर्त माफी मांगी है। इस मामले की सुनवाई मंगलवार को झारखंड हाईकोर्ट में हुई, जिसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

मामले की सुनवाई पांच न्यायाधीशों की पूर्ण पीठ के समक्ष हुई, जिसमें मुख्य न्यायाधीश एमएस सोना के अलावा जस्टिस सुजित नारायण प्रसाद, जस्टिस रंजन मुखोपाध्याय, जस्टिस आनंद सेन और जस्टिस राजेश शंकर शामिल थे। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता महेश तिवारी स्वयं कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुए और अपने आचरण को लेकर माफी याचना की।

क्या है पूरा मामला

दरअसल, यह मामला झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस राजेश कुमार की अदालत में एक प्रकरण की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता महेश तिवारी और न्यायाधीश के बीच हुई नोक-झोंक से जुड़ा है। इस घटनाक्रम को हाईकोर्ट ने अत्यंत गंभीर मानते हुए संज्ञान लिया था। न्यायालय की गरिमा और अनुशासन को लेकर इस प्रकरण पर न्यायिक हलकों में भी व्यापक चर्चा हुई थी।

इससे पहले कोर्ट नंबर-1 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की अध्यक्षता में पांच जजों की पूर्ण पीठ ने इस मामले की सुनवाई की थी। उस दौरान कोर्ट के समक्ष जज और अधिवक्ता के बीच हुई नोक-झोंक से संबंधित वीडियो फुटेज भी प्रस्तुत किया गया था।

सुनवाई के दौरान तत्कालीन चीफ जस्टिस ने अधिवक्ता महेश तिवारी से उनके व्यवहार को लेकर पक्ष जानना चाहा था। इस पर महेश तिवारी ने यह कहा था कि उन्होंने पूरे होश-हवास में जस्टिस राजेश कुमार से उक्त बातें कही थीं और उन्हें अपने शब्दों पर कोई पछतावा नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत

अधिवक्ता के इस रुख को गंभीरता से लेते हुए पूर्ण पीठ ने स्वतः संज्ञान लेते हुए महेश तिवारी को आपराधिक अवमानना मामले में नोटिस जारी किया था। इसके बाद अधिवक्ता महेश तिवारी ने हाईकोर्ट द्वारा जारी अवमानना नोटिस को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी, जिससे हाईकोर्ट में मामला आगे बढ़ा।

मंगलवार की सुनवाई में अधिवक्ता द्वारा बिना शर्त माफी मांगे जाने के बाद हाईकोर्ट ने मामले में अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। अब सभी की निगाहें अदालत के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि न्यायालय इस अवमानना प्रकरण में क्या रुख अपनाता है।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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