चेन्नई: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को मद्रास हाईकोर्ट से एक अहम निर्देश मिला है। अदालत ने उन्हें 10 लाख रुपये जमा कराने का आदेश दिया है। यह राशि उनके द्वारा दायर मानहानि मामले में पेश किए गए सबूतों से जुड़ी जरूरी प्रक्रिया पूरी कराने के लिए खर्च की जाएगी।
दरअसल, यह पूरा मामला साल 2013 के आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी विवाद से जुड़ा है। उस समय कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और बयानों में धोनी का नाम भी कथित तौर पर जोड़ा गया था। अपने नाम को इस आपराधिक प्रकरण में घसीटे जाने से आहत होकर धोनी ने एक मीडिया कंपनी, एक आईपीएस अधिकारी और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। यह मामला पिछले कई वर्षों से न्यायालय में लंबित है और इसकी सुनवाई लगातार जारी है।
सीडी के ट्रांसलेशन-ट्रांसक्रिप्शन पर खर्च
मानहानि केस में सबूत के तौर पर धोनी की ओर से कई न्यूज चैनलों के कार्यक्रमों की सीडी अदालत में पेश की गई थीं। इन सीडी में हिंदी भाषा में प्रसारित खबरें और चर्चाएं शामिल हैं। अब अदालत ने इन वीडियो रिकॉर्डिंग्स का आधिकारिक अनुवाद (ट्रांसलेशन) और शब्दशः लिप्यंतरण (ट्रांसक्रिप्शन) कराने का आदेश दिया है।
जस्टिस आर.एन. मंजुला की एकल पीठ ने अपने आदेश में कहा कि यह कार्य लंबा और समय लेने वाला है। इसके लिए अलग से एक इंटरप्रेटर और टाइपिस्ट की नियुक्ति करनी होगी, जो सीडी में उपलब्ध सामग्री को ठीक उसी रूप में लिखित दस्तावेज में परिवर्तित करेंगे। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में लगभग तीन से चार महीने का समय लग सकता है।
पुराने आदेश का हवाला
कोर्ट ने 28 अक्टूबर 2025 को पारित अपने पूर्व आदेश का हवाला देते हुए कहा कि सबूत के रूप में प्रस्तुत सामग्री के अनुवाद और लिप्यंतरण का खर्च शिकायतकर्ता को ही वहन करना होगा। इसी आधार पर अदालत ने धोनी को 12 मार्च तक 10 लाख रुपये जमा कराने का निर्देश दिया है। धोनी की ओर से इस आदेश पर सहमति जताई गई है। जानकारी के मुताबिक, वह यह राशि मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रिलीफ फंड में जमा कराएंगे।
मार्च में पूरी होगी प्रक्रिया, 12 मार्च को अगली सुनवाई
अदालत ने निर्देश दिया है कि ट्रांसक्रिप्शन का कार्य मार्च के तीसरे सप्ताह तक पूरा कर लिया जाए। मामले की अगली सुनवाई भी 12 मार्च को ही निर्धारित की गई है।
इस ताजा आदेश के बाद अब मानहानि मामले की सुनवाई नए चरण में प्रवेश करेगी, जहां प्रस्तुत साक्ष्यों के आधिकारिक दस्तावेजीकरण के आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी। 2013 के विवाद से जुड़ा यह मामला अब भी न्यायिक प्रक्रिया में है और आने वाले समय में इसमें महत्वपूर्ण कानूनी पहलू सामने आ सकते हैं।












