मझिआंव (गढ़वा): नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड संख्या 9 आमर, 10 भूसुआ, 11 बिरबंधा एवं 12 खजूरी के ग्रामीणों ने वर्ष 2026 में होने वाले नगर पंचायत चुनाव के पूर्ण बहिष्कार का निर्णय लिया है। यह फैसला लकड़ही टोला स्थित बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा परिसर में आयोजित बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। बैठक की अध्यक्षता अशोक पाल उर्फ बिंदेश्वरी पाल ने की।
बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में ग्रामीणों ने नगर पंचायत गठन को गलत बताते हुए कड़ा विरोध जताया। बिंदेश्वरी पाल ने कहा कि यह क्षेत्र नगर पंचायत के योग्य नहीं है। तीन ओर से घने जंगल और पहाड़ियों से घिरा यह इलाका पूर्णतः कृषि आधारित है, जहां लगभग 95 प्रतिशत आबादी खेती पर निर्भर है। इसके बावजूद लोगों पर शहरी टैक्स थोप दिए गए हैं, जबकि किसानों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं से वे वंचित हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन गांवों को नगर पंचायत से अलग नहीं किया गया तो नगर पंचायत चुनाव के साथ-साथ विधानसभा और लोकसभा चुनाव का भी बहिष्कार किया जाएगा।
इबरार खान ने कहा कि नगर पंचायत में शामिल किए जाने के बाद भी आज तक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। लोग टैक्स का बोझ उठाने में सक्षम नहीं हैं। वहीं, आकाश कुमार रवि ने कहा कि 15 वर्ष बीत जाने के बावजूद विकास कार्य शून्य हैं, उल्टे टैक्स पर टैक्स लगाया जा रहा है, जो ग्रामीणों पर जबरन शहरी बोझ है।
पद्मभूषण पाठक ने बताया कि चार से पांच गांव ग्राम पंचायत की पात्रता रखते हैं और क्षेत्र का लगभग 45 प्रतिशत भूभाग वन विभाग की भूमि है। उन्होंने कहा कि पूर्व उपायुक्त शेखर जामूवार के कार्यकाल में सर्वे कराया गया था, जिसका पत्रांक 210, दिनांक 2 जुलाई 2024 है। वर्तमान उपायुक्त दिनेश कुमार यादव ने भी स्वयं सर्वे कर राज्य सरकार को रिपोर्ट भेजी है।
भारत कुमार कुशवाहा ने बताया कि नगर पंचायत से अलग होने की मांग को लेकर वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव का भी बहिष्कार किया गया था। फरीद खान ने कहा कि बार-बार धरना-प्रदर्शन और आवेदन देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए अब मजबूरन उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
सत्येंद्र तिवारी ने कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष संकल्प लिया गया है कि जब तक नगर पंचायत से अलग नहीं किया जाएगा, तब तक वोट का अनिश्चितकालीन बहिष्कार जारी रहेगा।
बैठक में सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे, जिन्होंने ‘नगर पंचायत से अलग करो’ के नारे लगाए और चारों वार्डों के मतदान केंद्रों पर चुनाव बहिष्कार की घोषणा की।
ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से यह भी निर्णय लिया कि इन चारों गांवों से कोई भी व्यक्ति वार्ड पार्षद या नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए नामांकन नहीं करेगा और न ही मतदान करेगा।
मौके पर फुलेश्वर चौधरी, प्रमोद पाल, शमशाद खान, दिलीप सिंह सहित अन्य ग्रामीण मौजूद थे।














