July 26, 2026

मणिपुर के सबसे पुराने विद्रोही समूह ‘UNLF’ ने छोड़ा हिंसा का रास्ता, शांति समझौते पर किए हस्ताक्षर

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झारखंड वार्ता

मणिपुर:- मणिपुर हिंसा, जिसने पूरे राज्‍य ही नहीं देश को हिला कर दिया था, उस पर महीनों बाद काबू पाया गया था। बुधवार को इस दिशा में बड़ी कामयाबी मिली है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार (29 नवंबर) को कहा कि मणिपुर में सबसे पुराना सशस्त्र समूह यूएनएलएफ हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने पर सहमत हो गया है। उन्होंने बताया कि यूएनएलएफ ने एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

गृह मंत्री ने कहा, ”मणिपुर का सबसे पुराना घाटी स्थित सशस्त्र समूह यूएनएलएफ हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने पर सहमत हो गया है। मैं लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में उनका स्वागत करता हूं और शांति और प्रगति के पथ पर उनकी यात्रा के लिए शुभकामनाएं देता हूं।”

3 मई से भड़की थी हिंसा

अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मैतेई समुदाय की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में 3 मई को आयोजित ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के बाद भड़की हिंसा के बाद से 180 से अधिक लोग मारे गए हैं। मणिपुर की आबादी में मैतेई लोगों की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है। वे ज्यादातर इम्फाल घाटी में रहते हैं, जबकि आदिवासी (नागा और कुकी) की आबादी 40 प्रतिशत हैं। ये मुख्य रूप से पहाड़ी जिलों में रहते हैं।

यूएनएलएफ (UNLF)

यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (UNLF) को यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ मणिपुर के नाम से भी जाना जाता है। ये पूर्वोत्तर भारत के मणिपुर राज्य में सक्रिय एक अलगाववादी विद्रोही समूह है। इसका मकसद एक संप्रभु और समाजवादी मणिपुर की स्थापना करना है। उग्रवादी संगठन UNLF 24 नवंबर, 1964 में बना था। इसे समरेंद्र सिंह के नेतृत्व में स्थापित किया था। UNLF मणिपुर में सबसे पुराना मैतेई विद्रोही समूह है। 70-80 के दशक में इस संगठन ने बड़े स्तर पर भर्तियां की, 1990 में UNLF ने मणिपुर को भारत से अलग करने का फैसला किया था। इसी साल UNLF ने मणिपुर पीपुल्स आर्मी (एमपीए) नामक विंग बनाई।

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