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नई दिल्ली: जाते-जाते भी मानसून देश को चैन की सांस नहीं लेने दे रहा है। वापसी की राह पकड़ने के बीच बादलों ने ऐसा अचानक यू-टर्न लिया है कि मौसम विभाग (IMD) को दिल्ली-एनसीआर से लेकर पूर्वोत्तर तक एक साथ 17 राज्यों के लिए ‘महा-अलर्ट’ जारी करना पड़ गया है। आज यानी 6 अक्टूबर को देश के आधे हिस्से में भीषण बारिश, वज्रपात और 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाले तूफानी झोंकों का तांडव देखने को मिल सकता है।
बंगाल की खाड़ी में तेजी से उभर रहे साइक्लोनिक सर्कुलेशन और उत्तर भारत पर सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ ने मिलकर मौसम का मिजाज पूरी तरह बिगाड़ दिया है। गंगा के तटीय बंगाल से लेकर मध्य महाराष्ट्र तक फैली ट्रफ लाइन ने इस सिस्टम को और ज्यादा आक्रामक बना दिया है।
दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से लेकर आंध्र प्रदेश और पूर्वोत्तर के राज्यों (अरुणाचल, नागालैंड, मिजोरम) तक भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। किसानों को खुले खेतों में न जाने और बिजली कड़कने के दौरान सुरक्षित ठिकानों पर रहने की सख्त हिदायत दी गई है।
पहाड़ों पर बर्फबारी और लैंडस्लाइड का डबल अटैक, समंदर में मछुआरों के जाने पर पूरी तरह रोक
हिमालयी क्षेत्रों में मौसम करवट ही नहीं, सीधे बगावत पर उतर आया है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी सूबों में तेज मूसलाधार बारिश के चलते भूस्खलन (लैंडस्लाइड) का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इसके साथ ही, 6 से 10 अक्टूबर के बीच ऊंचाई वाले 3 से अधिक राज्यों में सीजन की पहली भारी बर्फबारी की दस्तक तय मानी जा रही है। प्रशासन ने पर्यटकों और यात्रियों से अपील की है कि वे पहाड़ों की ओर रुख करने से पहले मौसम का ताजा हाल जरूर जांच लें।
उधर, बंगाल की खाड़ी के अशांत होने के कारण तटीय इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। उफनती लहरों और तेज चक्रवाती हवाओं को देखते हुए मछुआरों को तुरंत समुद्र से लौटने और गहरे पानी में न उतरने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। मैदानी इलाकों में पानी का भराव और पहाड़ों में पत्थरों का गिरना अगले 48 घंटों में आम जनजीवन की रफ्तार थाम सकता है।





