
रांची: झारखंड के सारंडा क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों से जुड़े रहे दो सदस्यों ने कोलकाता पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। आत्मसमर्पण करने वालों में माओवादी संगठन के सब जोनल कमेटी सदस्य समीर महतो उर्फ मंगल और उसकी पत्नी मालती मुर्मू शामिल हैं। दोनों पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम जिले के रहने वाले हैं। पुलिस के सामने हथियार डालने के दौरान उन्होंने एक AK-47 और एक इंसास राइफल भी सौंपी।
मिली जानकारी के अनुसार, समीर महतो उर्फ मंगल पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम जिले के बेलपहाड़ी थाना क्षेत्र स्थित बिदी गांव का निवासी है। वह माओवादी संगठन में सब जोनल कमेटी सदस्य के रूप में सक्रिय था। झारखंड सरकार की ओर से उस पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। वहीं, उसकी पत्नी मालती मुर्मू गोपीबल्लभपुर गांव की रहने वाली है और संगठन में एरिया कमांडर की जिम्मेदारी संभाल रही थी। उस पर दो लाख रुपये का इनाम घोषित था।
कोलकाता पुलिस आयुक्त के समक्ष किया आत्मसमर्पण
जानकारी के मुताबिक, दोनों माओवादियों ने कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय नंदा के सामने आत्मसमर्पण किया। इस दौरान उन्होंने अपने पास मौजूद एक AK-47 और एक इंसास राइफल पुलिस को सौंप दी। पुलिस के अनुसार, समीर महतो के खिलाफ झारखंड में छह से सात आपराधिक मामले दर्ज हैं। हालांकि, इन मामलों का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है।
आत्मसमर्पण के बाद समीर महतो ने सशस्त्र संघर्ष के जरिए सामाजिक बदलाव लाने की अवधारणा पर सवाल उठाते हुए कहा कि हथियारों के बल पर समाज में परिवर्तन नहीं किया जा सकता। उसके इस बयान को माओवादी गतिविधियों से अलग होने के फैसले के संदर्भ में देखा जा रहा है।
पहले भी माओवादी नेताओं ने डाले थे हथियार
पश्चिम बंगाल में माओवादी संगठन से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई और आत्मसमर्पण का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले जून महीने में माओवादी नेता पुष्पा उर्फ शकुंतला ने भी कोलकाता पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था। वहीं, इसके करीब एक महीने पहले वरिष्ठ माओवादी नेता श्रद्धा बिस्वास उर्फ बेला को उत्तर काशीपुर इलाके से गिरफ्तार किया गया था।
इन घटनाओं के बीच समीर महतो और मालती मुर्मू का आत्मसमर्पण सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। खासकर सारंडा जैसे क्षेत्र में सक्रिय रहे माओवादी कैडरों का संगठन छोड़ना सुरक्षा व्यवस्था और माओवादी नेटवर्क के लिहाज से अहम है।
झारखंड में माओवादी नेटवर्क पर कार्रवाई के बाद बदले हालात
झारखंड में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ सुरक्षा बलों ने पिछले वर्षों में लगातार अभियान चलाए हैं। सारंडा जंगल लंबे समय तक माओवादियों के प्रमुख ठिकानों में शामिल रहा। सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बाद इस क्षेत्र में माओवादी संगठन की मौजूदगी को कमजोर करने के लिए कई अभियान चलाए गए।
हालांकि, राज्य से माओवाद के पूरी तरह समाप्त होने और सारंडा में अंतिम गढ़ के ध्वस्त होने जैसे दावों की आधिकारिक स्थिति की अलग से पुष्टि आवश्यक है। फिलहाल, कोलकाता पुलिस के सामने दो इनामी माओवादियों का आत्मसमर्पण और उनके द्वारा हथियार सौंपा जाना इस घटनाक्रम की प्रमुख बात है।



