नई दिल्ली: नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत कुल सात आरोपियों को नोटिस जारी किया है। मामले में अगली सुनवाई की तारीख 12 मार्च 2026 तय की गई है।
दरअसल, यह मामला राऊज एवेन्यू कोर्ट के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें अदालत ने ED की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। निचली अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि नेशनल हेराल्ड प्रकरण की जांच पहले से ही दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) कर रही है, ऐसे में इसी मामले को आधार बनाकर मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अलग से कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई जा सकती।
निचली अदालत के फैसले को ED ने दी थी चुनौती
राऊज एवेन्यू कोर्ट के इस फैसले से असहमत ED ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। ED का तर्क था कि मनी लॉन्ड्रिंग का मामला अलग प्रकृति का है और इसमें जांच व कार्रवाई का अधिकार एजेंसी को है। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की बेंच ने सभी आरोपियों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष जानने का निर्देश दिया है।
दिल्ली हाईकोर्ट के इस कदम के बाद कांग्रेस पार्टी आक्रामक रुख में नजर आई। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह पूरा मामला राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है और सरकार लगातार केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्ष को दबाने के लिए कर रही है। कांग्रेस का दावा है कि अदालतों ने समय-समय पर यह स्पष्ट किया है कि कानून का दुरुपयोग स्वीकार्य नहीं है।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि राऊज एवेन्यू कोर्ट के फैसले से साफ हो गया था कि मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप टिकाऊ नहीं है, बावजूद इसके ED द्वारा हाईकोर्ट का रुख करना सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करता है।
अब अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें
फिलहाल इस मामले में अब अगली अहम सुनवाई मार्च 2026 में होगी। तब तक सभी आरोपियों को दिल्ली हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल करना होगा। नेशनल हेराल्ड केस एक बार फिर सियासत और न्यायिक प्रक्रिया के केंद्र में आ गया है, जिस पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं।













