जामताड़ा में धान की रोपनी 44.62% पर अटकी: 35 दिनों में सिर्फ 404.03 मिमी बारिश, कृषि विभाग का वैकल्पिक फसलों की खेती पर जोर
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जामताड़ा जिले में इस बार सामान्य से कम बारिश होने के कारण खरीफ फसलों पर प्रतिकूल असर साफ दिख रहा है. सबसे ज्यादा असर धान की खेती पर पड़ा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है. कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले को खरीफ सीजन में 606.86 मिमी बारिश की आवश्यकता थी, लेकिन अब तक केवल 404.03 मिमी बारिश दर्ज की गई है. पिछले साल इसी अवधि में 832.23 मिमी बारिश हुई थी, जो इस साल से लगभग दोगुनी थी. बारिश की कमी के कारण जिले में 52 हजार हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक 23,204 हेक्टेयर यानी 44.62 फीसदी रकबे में ही रोपनी हो सकी है. कई किसान अभी भी पर्याप्त बारिश का इंतजार कर रहे हैं। वैकल्पिक फसलों पर जोर, मक्के की स्थिति बेहतर. धान की तुलना में मक्के की खेती की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बतायी जा रही है. 15,700 हेक्टेयर लक्ष्य के विरुद्ध 12,677 हेक्टेयर यानी 80.75 प्रतिशत क्षेत्रफल में मक्का की बुआई हो चुकी है. जबकि दलहन के लिए 16,700 हेक्टेयर लक्ष्य के विरुद्ध केवल 1,842 हेक्टेयर (11.03 प्रतिशत) और तिलहन के लिए 860 हेक्टेयर लक्ष्य के विरुद्ध केवल 147 हेक्टेयर में खेती की गई है। मोटे अनाज के लिए निर्धारित लक्ष्य 1690 हेक्टेयर के विरूद्ध अब तक मात्र 30 हेक्टेयर (1.78 प्रतिशत) क्षेत्र में ही बुआई हो सकी है। जिला कृषि पदाधिकारी लव कुमार ने बताया कि इस वर्ष अल नीनो का प्रभाव देखा जा रहा है, जिसके कारण बारिश कम हुई है. इसका सबसे ज्यादा असर धान पर पड़ा है. उन्होंने कहा कि विभाग आकस्मिक फसल योजना के तहत किसानों को मूंग, अरहर व मडुआ का बीज उपलब्ध करा रहा है. किसान 15 अगस्त तक इन फसलों की बुआई छिटकवा विधि से कर सकते हैं। साथ ही आईआईएचआर से उन्नत किस्म की सब्जियों के बीज भी जल्द उपलब्ध कराये जायेंगे. मडुआ और नेपियर घास बने विकल्प कृषि विभाग मडुआ (रागी) जैसी कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा दे रहा है, जो पहले ग्रामीण इलाकों की मुख्य फसल रही है. जामताड़ा सदर प्रखंड के आसनचुवां गांव निवासी किसान इंद्रजीत महतो ने बताया कि वे दो एकड़ में मडुआ की खेती कर रहे हैं. यह एक सुरक्षित विकल्प माना जाता है. उनका कहना है कि बदलते मौसम में किसानों को मोटे अनाज पर ध्यान देना चाहिए. कम बारिश का असर पशुपालन पर भी दिख रहा है. हरे चारे की कमी की आशंका के बीच जेएसएलपीएस क्लस्टर की महिला गीता देवी ने पांच कट्ठा जमीन में लगभग 5,000 नेपियर घास के पौधे लगाए हैं, ताकि जानवरों को साल भर चारा उपलब्ध रहे. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही बारिश नहीं हुई तो किसानों को धान, बाजरा, ज्वार और दालों जैसी कम पानी वाली फसलों की ओर रुख करना होगा।
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