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झारखंड: हिंसक हो चुके हाथियों के ‘हनी ट्रैप’ के लिए कर्नाटक से आधा दर्जन कुनकी हाथी लाने की तैयारी

On: February 15, 2026 9:45 PM
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चाईबासा:महीने भर से झारखंड के हजारीबाग और चाईबासा जिले में हाथियों ने आतंक मचा रखा है 25 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। चाईबासा में अकेले हाथी ने 15 से अधिक लोगों की जान ले ली है। हजारीबाग में पांच हाथियों का समूह सात लोगों की एक ही रात में जान ले चुका है। अब ये कुनकी हाथी इन वहशी हाथियों को अपने प्रेमजाल में लाकर शांत करेंगे और लोगों की जान बचांगे। सीएम हेमंत सोरेन ने भी कहा था कि अब हाथियों से एक भी मौत नहीं होनी चाहिए और यह उपाय निकला गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कर्नाटक वन विभाग ने हाथियों को प्रशिक्षित करने और उनके साथ महावत रखने का प्रयोग किया है। इन्हें कुनकी हाथी कहा जाता है। कुनकी या कुमकी फारसी भाषा का शब्द है जसका अर्थ होता है सहायक। हाथियों को प्रशिक्षित और अनुशासित बनाकर उन्हें बिगड़ैल हाथियों पर नियंत्रण करने भेजा जाता है।

तमिलनाडू में कालेम और कर्नाटक का अभिमन्यु नामक कुनकी हाथी कई सफल अभियान में सहायक रहा है। हाथियों के शरीर से निकलने वाली गंध और आपसी व्यवहार के ये बेलगाम हाथियों पर नियंत्रण करते हैं।

क्यों हिंसक हो रहे हाथी

झारखंड में करीब 600 हाथी रहते हैं। ये जंगलों में विचरण करते रहते हैं। लेकिन वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में जंगल छोटे हुए हैं। इस वजह से हाथियों को पर्याप्त मात्रा में भोजन नहीं मिल पा रहा है। सामान्य तौर पर एक हाथी की भोजन आवश्यकता दिन में 17 घंटे खाने से होती है।

लेकिन जंगल में संसाधन कम हुए हैं और हाथी आबादी वाले इलाके में प्रवेश कर रहे हैं। यहां खेतों में तैयार फसल, केला जैसे तैयार फल इन्हें खाने को मिल रहा है।

इससे इनकी भोजन आवश्यकता पूरी हो जा रही है। लेकिन क्षेत्र को लेकर आपसी प्रतिस्पर्धा बढ़ती है। इस वजह से किसी नर हाथी को झुंड छोड़ना पड़ता है और वह हिंसक हो जाता है।

वन एवं पर्यावरण विभाग प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार के मुताबिक कर्नाटक सरकार ने छह कुनकी हाथियों को देने की सहमति दे दी है। जल्द ही ये हाथी झारखंड आ जाएंगे। इनके साथ प्रशिक्षित महावत और ट्रैंक्युलाइज करने वाली टीम भी होगी। जो हाथी चाईबासा और हजारीबाग में हिंसक हुए हैं उनपर कुनकी हाथियों की मदद से नियंत्रण पा लिया जाएगा। कुनकी हाथियों का प्रयोग दूसरे राज्यों में भी ऐसी स्थिति में हुआ है जो सफल रहा है।

Satish Sinha

मैं सतीश सिन्हा, बीते 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने कई अखबारों और समाचार चैनलों में रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को इमानदारी से उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले तकरीबन 6 वर्षों से मैं 'झारखंड वार्ता' से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ।

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