
जमशेदपुर। मानगो में जलापूर्ति व्यवस्था और अग्निशमन सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मानगो फ्लाईओवर के नीचे मानगो चौक से ब्लू बेल्स स्कूल तक राज्य सरकार की ओर से स्वीकृत ₹24.62 करोड़ की लागत से बिछाई जा रही पाइपलाइन को लेकर जन विकास मंच के अध्यक्ष एवं पूर्व विधानसभा प्रत्याशी सौरभ विष्णु ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब इस परियोजना में राज्य सरकार का पैसा खर्च हो रहा है और पाइपलाइन मानगो की सड़कों के नीचे से गुजर रही है, तो स्थानीय निवासियों को इससे क्या लाभ मिलेगा, यह स्पष्ट होना चाहिए।
सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त विभागीय जवाबों का हवाला देते हुए सौरभ विष्णु ने कहा कि पाइपलाइन की स्वीकृत योजना में फायर हाइड्रेंट लगाने का प्रावधान नहीं है। वहीं, मानगो नगर निगम ने इस विषय को अपने कार्यक्षेत्र से संबंधित नहीं बताया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इस परियोजना में मानगो की स्थानीय जलापूर्ति और आग लगने की स्थिति में अग्निशमन के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी होगी।
₹24.62 करोड़ की पाइपलाइन, लेकिन मानगो को लाभ मिलने पर स्पष्टता नहीं
सौरभ विष्णु के अनुसार, पथ निर्माण विभाग, पथ प्रमंडल, जमशेदपुर ने 12 अक्टूबर 2026 को दिए गए अपने जवाब में बताया था कि मानगो चौक से ब्लू बेल्स स्कूल तक पाइपलाइन बिछाने की परियोजना की लागत ₹24.62 करोड़ है, जिसकी स्वीकृति राज्य सरकार ने दी है।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि पाइपलाइन का काम टाटा स्टील के स्पेसिफिकेशन के अनुरूप और उसके पर्यवेक्षण में कराया जा रहा है। जब इस परियोजना से लाभान्वित होने वाले लोगों के बारे में जानकारी मांगी गई, तो विभाग ने इस विषय को टाटा स्टील से संबंधित बताया।
इसी जवाब के आधार पर सौरभ विष्णु ने सवाल उठाया है कि यदि परियोजना में सरकारी राशि खर्च हो रही है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि इससे मानगो के आम नागरिकों को क्या सुविधा मिलेगी। क्या इस पाइपलाइन से स्थानीय लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी उपलब्ध हो सकेगा या इसका उपयोग किसी अन्य उद्देश्य के लिए किया जाएगा? उन्होंने परियोजना में मानगो के निवासियों के हितों को स्पष्ट करने की मांग की है।
फायर हाइड्रेंट लगाने का प्रावधान नहीं, RTI में विभाग का जवाब
इस मामले में 27 अक्टूबर 2026 को पथ निर्माण विभाग की ओर से दिए गए लिखित जवाब ने अग्निशमन व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सौरभ विष्णु के मुताबिक, विभाग ने स्पष्ट किया कि पाइपलाइन के स्वीकृत प्राक्कलन में फायर हाइड्रेंट लगाने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके अलावा, अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC), परामर्श अथवा सिफारिश से संबंधित कोई सूचना विभाग के कार्यालय अभिलेखों में उपलब्ध नहीं है।
इस जवाब के बाद परियोजना में अग्निशमन सुरक्षा की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मानगो जैसे घनी आबादी वाले इलाके में आग लगने की स्थिति में तत्काल पानी उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। ऐसे में पाइपलाइन के निर्माण के दौरान फायर हाइड्रेंट की व्यवस्था पर विचार किया गया था या नहीं, इसे लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए।
मानगो नगर निगम ने भी बताया अपने कार्यक्षेत्र से बाहर
सौरभ विष्णु ने बताया कि फायर हाइड्रेंट से जुड़े सवालों पर मानगो नगर निगम ने 15 अक्टूबर 2026 को दिए गए जवाब में कहा था कि यह विषय मानगो नगर निगम से संबंधित नहीं है।
उन्होंने इस जवाब के संदर्भ में झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 की धारा 70 का उल्लेख करते हुए कहा कि जलापूर्ति और अग्निशमन सेवाएं नगरपालिका के मूल कार्यों में शामिल हैं।
उनका कहना है कि जब एक ओर पथ निर्माण विभाग फायर हाइड्रेंट का प्रावधान नहीं होने की बात कह रहा है और दूसरी ओर नगर निगम इस मामले को अपने कार्यक्षेत्र से बाहर बता रहा है, तो स्थानीय नागरिकों के हितों की जिम्मेदारी और परियोजना में उनकी जरूरतों को शामिल करने के सवाल पर स्पष्टता जरूरी है।
जुलाई 2025 में उपायुक्त को सौंपा गया था ज्ञापन
सौरभ विष्णु के अनुसार, जुलाई 2025 में मानगो के निवासियों की ओर से उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपकर पाइपलाइन पर फायर हाइड्रेंट लगाने और स्थानीय जलापूर्ति के लिए टी-वाल्व उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।
उन्होंने बताया कि ज्ञापन सौंपे जाने के बाद प्रशासन की ओर से स्थल निरीक्षण भी किया गया था। हालांकि, पथ निर्माण विभाग ने लिखित रूप से बताया है कि इस ज्ञापन और स्थल निरीक्षण से संबंधित पत्राचार उसके कार्यालय के अभिलेखों में उपलब्ध नहीं है।
इससे संबंधित निर्णय और कार्रवाई की जानकारी प्राप्त करने के लिए 10 सितंबर 2026 को उपायुक्त कार्यालय में आवेदन दिया गया था। सौरभ विष्णु के मुताबिक, आवेदन को पथ निर्माण विभाग के पास भेज दिया गया, जबकि विभाग ने कुछ सवालों को वापस उपायुक्त कार्यालय से संबंधित बताया।
उनका कहना है कि इस तरह अलग-अलग विभागों के बीच आवेदन भेजे जाने के बावजूद अब तक मामले पर स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है।
सात सप्ताह बाद भी जानकारी नहीं, प्रथम अपील दायर
सौरभ विष्णु ने बताया कि उपायुक्त कार्यालय से जानकारी मांगे जाने के लगभग सात सप्ताह बाद भी उन्हें आवेदन पर लिए गए निर्णय के संबंध में सूचना नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने उपायुक्त कार्यालय के प्रथम अपीलीय पदाधिकारी के समक्ष प्रथम अपील दायर की है।
अब इस मामले में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित प्रशासनिक अधिकारी जुलाई 2025 में सौंपे गए ज्ञापन, स्थल निरीक्षण और पाइपलाइन में स्थानीय जरूरतों को शामिल करने की मांग पर क्या जानकारी उपलब्ध कराते हैं।
‘सरकारी पैसे से बन रही पाइपलाइन में मानगो का हिस्सा तय होना चाहिए’
इस मुद्दे पर सौरभ विष्णु ने कहा कि पाइपलाइन जनता के पैसे से बन रही है और मानगो की सड़क के नीचे से गुजरते हुए स्थानीय लोगों के घरों के सामने तक पहुंच रही है। ऐसे में यह तय होना चाहिए कि इस परियोजना में मानगो के निवासियों के लिए क्या व्यवस्था की गई है।
उन्होंने कहा, “यह पाइपलाइन जनता के पैसे से, जनता की सड़क के नीचे, मानगो के घरों के सामने से गुजर रही है। तो यह तय होना चाहिए कि इसमें मानगो का हिस्सा क्या है। पथ निर्माण विभाग कहता है प्रावधान नहीं, नगर निगम कहता है हमारा विषय नहीं—तो मानगो की आग बुझाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?”
उन्होंने आगे कहा कि उनका उद्देश्य किसी विभाग या कंपनी का विरोध करना नहीं, बल्कि परियोजना में जनहित और जनसुरक्षा को सुनिश्चित करना है। सरकार और कंपनी को मिलकर स्पष्ट करना चाहिए कि आग लगने की स्थिति में मानगो को इस पाइपलाइन से पानी मिलेगा या नहीं और स्थानीय निवासियों की रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी उपलब्ध कराने की कोई व्यवस्था है या नहीं।
सौरभ विष्णु ने यह भी कहा कि यदि किसी परियोजना के प्राक्कलन में संशोधन संभव है, तो जनसुरक्षा से जुड़े आवश्यक प्रावधानों को शामिल करने पर भी विचार किया जाना चाहिए।
जन विकास मंच की तीन प्रमुख मांगें
इस पूरे मामले में जन विकास मंच ने प्रशासन और संबंधित विभागों के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखी हैं।
1. फायर हाइड्रेंट की व्यवस्था: अग्निशमन विभाग के परामर्श से पाइपलाइन पर उपयुक्त दूरी पर फायर हाइड्रेंट लगाने का प्रावधान किया जाए, ताकि आग लगने की स्थिति में उनका उपयोग किया जा सके।
2. स्थानीय जलापूर्ति के लिए टी-वाल्व: मानगो के निवासियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पाइपलाइन में स्थानीय जलापूर्ति के लिए कनेक्शन बिंदु यानी टी-वाल्व उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही पाइपलाइन और फायर हाइड्रेंट के स्वामित्व तथा रखरखाव की जिम्मेदारी लिखित रूप से सार्वजनिक की जाए।
3. पुराने ज्ञापन पर कार्रवाई की जानकारी: जुलाई 2025 में उपायुक्त को सौंपे गए ज्ञापन और उसके बाद हुए स्थल निरीक्षण के संबंध में प्रशासन ने क्या निर्णय लिया, इसकी जानकारी और संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं।
अब प्रशासन के जवाब पर टिकी नजरें
₹24.62 करोड़ की लागत वाली इस पाइपलाइन को लेकर उठे सवाल अब केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्थानीय जलापूर्ति, अग्निशमन सुरक्षा और सरकारी धन से तैयार हो रही परियोजना में आम नागरिकों के हितों से भी जुड़े हैं।
जन विकास मंच की मांग है कि संबंधित विभाग आपसी जिम्मेदारी स्पष्ट करते हुए यह बताएं कि परियोजना से मानगो के निवासियों को क्या लाभ मिलेगा और उनकी सुरक्षा तथा पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए क्या व्यवस्था की जाएगी।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन, पथ निर्माण विभाग, मानगो नगर निगम और संबंधित कंपनी इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं और स्थानीय निवासियों की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है।





