गढ़वा: झारखंड मुक्ति मोर्चा के मिडिया पैनलिस्ट सह केंद्रीय सदस्य धीरज दुबे ने भाजपा के वरिष्ठ नेता रघुवर दास पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वे वर्तमान समय में पार्टी के भीतर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी में उन्हें अब कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी जा रही है और वे केवल साधारण सदस्य बनकर रह गए हैं।
दुबे ने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए रघुवर दास के निर्णयों का प्रभाव आज भी झारखंड की राजनीति पर दिख रहा है। उनके कार्यकाल में ऐसे कई फैसले लिए गए जिनके कारण आज तक राज्य में भाजपा मजबूत संगठनात्मक स्थिति में नहीं पहुंच पाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि ओडिशा के राज्यपाल रहने के दौरान भी विधानसभा चुनाव में हस्तक्षेप जैसी स्थिति बनी, जिसके बाद पार्टी नेतृत्व ने उन्हें वापस बुला लिया।
गढ़वा-पलामू क्षेत्र को लेकर भी उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री की नीतियों पर सवाल उठाए। दुबे ने कहा कि इस इलाके के युवाओं पर दोहरी नियोजन नीति थोपा गया था, जिसकी लंबी लड़ाई युवाओं ने लड़ी, आंदोलन में लाठी खाया, मुकदमे दर्ज हुए तब जाकर बाद में माननीय झारखंड उच्च न्यायालय ने इस नीति को रद्द किया था। इससे स्पष्ट हो गया था कि रघुवर दास का निर्णय युवाओं के हित में नहीं था।
उन्होंने आरोप लगाया कि रघुवर दास के शासनकाल में पिछड़े, दलित और आदिवासी छात्रों की छात्रवृत्ति में कटौती की गई थी, जिससे गरीब परिवारों के बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई। पारा शिक्षकों के आंदोलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज कराया गया, जिसे उन्होंने तानाशाही रवैया बताया। दुबे ने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए गढ़वा दौरे पर एक विशेष समाज को लेकर दिया गया बयान भी विवादित रहा था और इससे सामाजिक सद्भाव को ठेस पहुँची थी।
इसके साथ ही 2018 के नगर निकाय चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा प्रत्याशी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से शौचालय उद्घाटन कार्यक्रम के बहाने तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास का आगमन गढ़वा नामधारी कॉलेज के समीप हुआ था। उन्होंने दावा किया कि उस चुनाव में मतदान और मतगणना के बीच लगभग 110 मतों का अंतर था, और तत्कालीन भाजपा प्रत्याशी, झामुमो प्रत्याशी से मात्र 54 वोटों से विजयी घोषित हुईं थी।
दुबे ने नामधारी कॉलेज स्थित वज्रगृह परिसर में एक पुलिसकर्मी की संदिग्ध मौत का भी जिक्र करते हुए कहा कि आज तक स्पष्ट नहीं हो पाया कि वह आत्महत्या थी या हत्या, और इसकी पूरी जांच सार्वजनिक नहीं हुई। यह सारा घटनाक्रम मतगणना से ठीक एक दिन पहले घटित हुआ था। जिससे कई सवाल खड़े हुए थे। रघुवर दास को ज्ञात होना चाहिए कि अब राज्य में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन है और इस चुनाव में उनका कोई भी प्रपंच या धाँधली नहीं चलेगा।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सीएनटी-एसपीटी कानून में बदलाव का प्रयास कर आदिवासी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की कोशिश की गई थी।
श्री दुबे ने कहा कि निकाय चुनाव के दौरान रघुवर दास गढ़वा की जनता को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जनता अब पहले जैसी नहीं रही। लोग सब कुछ देख-समझ चुके हैं और किसी भी तरह के राजनीतिक झांसे में नहीं आने वाले हैं। राज्य में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में संवेदनशील सरकार काम कर रही है जो सामाजिक सुरक्षा के साथ राज्य को विकास की पटरी पर आगे बढ़ा रही रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को गढ़वा का बस स्टैंड, टाऊन हॉल, फ़ुटबॉल स्टेडियम, पार्क आदि का मुआयना करना चाहिए। तब उन्हें समझ आएगा कि उनके मुख्यमंत्रित्व काल में जर्जर और खस्ताहाल गढ़वा का विकास पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर के कार्यकाल में कितना हुआ है।
अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं रघुवर दास : धीरज दुबे














