नई दिल्ली: कांग्रेस के पूर्व वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शकील अहमद ने शनिवार को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी पर गंभीर और तीखे आरोप लगाए हैं। उनके बयान से कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर सार्वजनिक बहस के केंद्र में आ गई है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस मौके को भुनाते हुए राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व पर करारा प्रहार किया है।
शकील अहमद ने राहुल गांधी को डरपोक, असुरक्षित और तानाशाही प्रवृत्ति वाला नेता बताते हुए कहा कि मौजूदा कांग्रेस नेतृत्व में असहमति के लिए कोई जगह नहीं बची है। उनका आरोप है कि राहुल गांधी केवल उन्हीं युवा नेताओं को आगे बढ़ाते हैं, जो उनकी खुलकर प्रशंसा करते हैं और उनकी लाइन से सवाल नहीं करते।
पूर्व कांग्रेस महासचिव ने कहा कि राहुल गांधी वरिष्ठ नेताओं की सलाह सुनने को तैयार नहीं रहते और पार्टी को लोकतांत्रिक तरीके से नहीं चलाते। अहमद के मुताबिक, राहुल गांधी इस भ्रम में जी रहे हैं कि राष्ट्रीय राजनीति में मौजूदगी भर से कांग्रेस हमेशा दूसरे नंबर की पार्टी बनी रहेगी, जबकि जमीनी सच्चाई इससे अलग है।
अमेठी हार का जिक्र, नेतृत्व पर सवाल
शकील अहमद ने राहुल गांधी की चुनावी पराजय का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जब वह कांग्रेस अध्यक्ष थे, तब वे अमेठी जैसी पारंपरिक सीट भी नहीं बचा सके। उन्होंने दावा किया कि यह हार केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि राहुल गांधी के व्यवहार, कार्यशैली और नेतृत्व शैली का परिणाम थी।
अहमद ने कहा कि जिस सीट को गांधी परिवार और उनके पूर्वजों ने दशकों तक मजबूत किया, उसी सीट से हार कांग्रेस के लिए गंभीर संकेत थी।
सोनिया गांधी से तुलना
राहुल गांधी की तुलना सोनिया गांधी से करते हुए शकील अहमद ने कहा कि सोनिया गांधी ने राजीव गांधी, पी.वी. नरसिम्हा राव और सीताराम केसरी के दौर की कांग्रेस को अपने नेतृत्व में एकजुट किया और पार्टी को सत्ता तक पहुंचाया।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी, सोनिया गांधी की बनाई कांग्रेस को भी अपनी पार्टी नहीं बना सके।
मुस्लिम नेतृत्व और आउटरीच पर गंभीर आरोप
शकील अहमद का सबसे संवेदनशील और तीखा हमला कांग्रेस की मुस्लिम राजनीति को लेकर रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि अब कांग्रेस के बड़े नेता मुस्लिम नेताओं के साथ तस्वीर खिंचवाने से भी कतराते हैं, इस डर से कि कहीं हिंदू वोट बैंक नाराज़ न हो जाए।
उनका कहना है कि मुस्लिम आउटरीच अब रणनीति नहीं, बल्कि केवल औपचारिकता बनकर रह गई है और पार्टी का नेतृत्व इस वर्ग को लेकर स्पष्ट नहीं दिखता।
बिहार SIR पर भी बयान
बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी शकील अहमद ने कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा कोई व्यक्ति नहीं मिला, जिसने यह दावा किया हो कि उसका नाम मतदाता सूची से हटाया गया है, जबकि इस मुद्दे को लेकर राजनीति तेज की जा रही है।
बीजेपी का पलटवार
शकील अहमद के इन बयानों के बाद बीजेपी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। बीजेपी नेताओं ने कहा कि कांग्रेस की अंदरूनी सच्चाई अब उनके अपने नेता ही उजागर कर रहे हैं।
बीजेपी का दावा है कि राहुल गांधी के नेतृत्व से असंतोष कांग्रेस के भीतर गहराता जा रहा है और पार्टी लगातार दिशाहीन होती जा रही है।
राजनीतिक गलियारों में यह बयान कांग्रेस के लिए आने वाले समय में नई मुश्किलें खड़ी कर सकता है, खासकर तब जब पार्टी विपक्षी एकता और संगठन विस्तार की कोशिशों में जुटी हुई है।














