भोपाल: अनुसूचित जाति और जनजाति अधिकारी-कर्मचारी संघ (AJAKS) के नए चुने गए प्रदेश अध्यक्ष और सीनियर IAS अधिकारी संतोष वर्मा एक बयान को लेकर भारी विवादों में घिर गए हैं। राज्य सम्मेलन में आर्थिक आधार पर मिलने वाले आरक्षण को लेकर उन्होंने जो टिप्पणी की, वह सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और सवर्ण संगठनों में गहरी नाराज़गी पैदा कर रही है।
क्या कहा था संतोष वर्मा ने?
सम्मेलन के दौरान वर्मा ने कहा था कि “आर्थिक आधार पर मिलने वाला आरक्षण तब तक जारी रहना चाहिए, जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी मेरे बेटे को दान न कर दे या उससे रिश्ता न बना ले। जब तक रोटी-बेटी का रिश्ता नहीं होगा, तब तक सामाजिक पिछड़ेपन की वजह से आरक्षण की पात्रता बनी रहेगी। आप जाति खत्म कर दीजिए, हमें आरक्षण की जरूरत नहीं पड़ेगी।”
उनके इस बयान को सवर्ण समाज के संगठन आपत्तिजनक, अपमानजनक और भड़काऊ बता रहे हैं।
सवर्ण संगठनों में रोष
संतोष वर्मा के इस बयान पर कई कर्मचारी संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक और तृतीय कर्मचारी संघ के महासचिव उमाशंकर तिवारी ने संयुक्त बयान में कहा कि “AJAKS के प्रदेश अध्यक्ष का यह बयान न सिर्फ अनुचित है बल्कि पूरे सवर्ण समुदाय का अपमान भी है। एक वरिष्ठ अधिकारी से इस तरह की टिप्पणी की उम्मीद नहीं की जा सकती।” आपत्तिजनक बयान के विरोध में मंत्रालय में आज प्रदर्शन होगा। इसके बाद आईएएस वर्मा के विरुद्ध कार्रवाई की मांग को लेकर सवर्ण कर्मचारी उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल को ज्ञापन सौंपेंगे। यह प्रदर्शन दोपहर बाद होने वाली कैबिनेट बैठक के पहले किया जाएगा।
उन्होंने सरकार से तुरंत संज्ञान लेने और आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
सोशल मीडिया पर तेज़ बहस
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बहस तेज़ है। कई यूजर्स इसे समाज को बांटने वाला बयान बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग आरक्षण विवाद के संदर्भ में इसे वर्मा की व्यक्तिगत प्रतिक्रिया कह रहे हैं।
प्रशासनिक हलकों में भी हलचल
IAS अधिकारी होने के कारण यह विवाद प्रशासनिक गलियारों में भी पहुंच गया है। अधिकारी वर्ग में भी इस बात पर चर्चा है कि ऐसी टिप्पणी सेवा नियमों के दायरे में कितनी उचित है।
AJAKS की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं
अब तक AJAKS संगठन की ओर से इस विवाद पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जबकि मामले ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर गर्मी बढ़ा दी है।














