गढ़वा: जिले के केतार प्रखंड में स्थित राज्य खाद्य निगम (SFC) के गोदाम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का हजारों क्विंटल चावल गायब होने का मामला सामने आया है। जांच में गोदाम से करीब 9003 क्विंटल कस्टम मिल्ड राइस (CMR) के गायब होने की पुष्टि हुई है, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग तीन करोड़ रुपये आंकी गई है।
इस गंभीर अनियमितता ने न केवल प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है, बल्कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पारदर्शिता पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
सचिव ने जांच पर उठाए सवाल, जताई नाराजगी
मामले की गंभीरता को देखते हुए खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के सचिव उमा शंकर सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अब तक की गई जांच को असंतोषजनक बताते हुए उस पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सचिव ने डी.ओ. पत्र जारी कर स्पष्ट किया है कि पूर्व में की गई जांच में कई महत्वपूर्ण खामियां सामने आई हैं और यह जांच विभागीय मानकों पर खरी नहीं उतरती।
समय पर नहीं सौंपी गई जांच रिपोर्ट
पत्र में उल्लेख किया गया है कि विभाग द्वारा इस घोटाले की जांच के लिए पहले ही 13 अक्टूबर 2025 को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था। लेकिन निर्धारित समय-सीमा के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई। इसके बाद 31 अक्टूबर 2025 को रिमाइंडर भेजा गया, बावजूद इसके विभाग को अब तक न तो पूरी रिपोर्ट मिली और न ही ठोस निष्कर्ष।
हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
इस बड़े अनाज घोटाले की गूंज झारखंड हाईकोर्ट तक पहुंच चुकी है। हाईकोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की थी। कोर्ट में पेश रिपोर्ट से यह संकेत मिला कि जांच बिना स्थल निरीक्षण और तकनीकी परीक्षण के ही पूरी कर ली गई। केवल संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और राइस मिलरों से प्राप्त स्पष्टीकरण के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई, जो नियमों और प्रक्रियाओं के स्पष्ट रूप से विपरीत मानी गई।
गैर-विभागीय स्वतंत्र जांच के निर्देश
इन खामियों को देखते हुए सचिव उमा शंकर सिंह ने निर्देश दिया है कि अब पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र और गैर-विभागीय पदाधिकारी से कराई जाए। उन्होंने कहा कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यात्मक होनी चाहिए। साथ ही सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट विभाग को सौंपने के आदेश दिए गए हैं।
कई स्तरों पर मिलीभगत की आशंका
इस अनाज घोटाले में गोदाम प्रबंधन, जिला आपूर्ति कार्यालय, राइस मिलर और परिवहन व्यवस्था से जुड़े लोगों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। जानकारों का कहना है कि वरीय अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर गोदाम से अनाज का गायब होना संभव नहीं है।
दोषियों पर तय मानी जा रही कार्रवाई
यदि जांच में लापरवाही, अनियमितता या भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य दोषियों के खिलाफ कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला राज्य की सार्वजनिक वितरण प्रणाली की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।














