नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने सोमवार, 9 फ़रवरी को नई सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सूची जारी करते हुए बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया है। इस सूची में दिग्गज बल्लेबाज़ रोहित शर्मा और विराट कोहली को ग्रेड बी में डाउनग्रेड कर दिया गया है, जबकि अब तक सबसे ऊँची मानी जाने वाली ए+ श्रेणी को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
रोहित और विराट फिलहाल केवल एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय (ODI) क्रिकेट में सक्रिय हैं। दोनों खिलाड़ियों के टेस्ट और T20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद, BCCI के मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट मानदंडों के अनुसार उन्हें शीर्ष श्रेणी में बनाए रखना संभव नहीं माना गया।
ए+ श्रेणी क्यों हुई खत्म?
ए+ श्रेणी की शुरुआत पूर्व कमेटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर्स (CoA) के कार्यकाल में हुई थी। माना जाता है कि यह श्रेणी पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के सुझाव पर लाई गई थी। इसका उद्देश्य उन खिलाड़ियों को अतिरिक्त सम्मान और वित्तीय प्रोत्साहन देना था, जो तीनों प्रारूपों- टेस्ट, वनडे और T20I में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हों।
अब तक इस विशेष श्रेणी में केवल चार ही खिलाड़ी जगह बना सके थे, विराट कोहली, रोहित शर्मा, रविंद्र जडेजा और जसप्रीत बुमराह।
हालांकि, इनमें से कोहली, रोहित और जडेजा के एक या दो प्रारूपों से हट जाने के बाद स्थिति बदल गई। BCCI नहीं चाहता था कि ए+ श्रेणी में केवल जसप्रीत बुमराह अकेले खिलाड़ी के रूप में बने रहें। इसी कारण बोर्ड ने इस श्रेणी को पूरी तरह समाप्त करने का निर्णय लिया।
सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट की रकम का ढांचा
ए+ श्रेणी के समाप्त होने से पहले सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट की वार्षिक रिटेनरशिप फीस इस प्रकार थी:
ग्रुप A+ – ₹7 करोड़
ग्रुप A – ₹5 करोड़
ग्रुप B – ₹3 करोड़
ग्रुप C – ₹1 करोड़
अब नई सूची में खिलाड़ियों को केवल ग्रुप A, B और C में ही शामिल किया गया है।
BCCI ने इस बार कुल 30 पुरुष और 21 महिला खिलाड़ियों को सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट प्रदान किए हैं। पुरुषों की ग्रेड A सूची में प्रमुख नामों में शुभमन गिल, जसप्रीत बुमराह और रविंद्र जडेजा शामिल हैं। वहीं महिलाओं की शीर्ष श्रेणी में हरमनप्रीत कौर, स्मृति मंधाना, जेमिमा रोड्रिग्स और दीप्ति शर्मा को जगह दी गई है।


बदलते दौर का संकेत
रोहित शर्मा और विराट कोहली का ग्रेड बी में आना भारतीय क्रिकेट में एक पीढ़ीगत बदलाव का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। BCCI अब सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट नीति को खिलाड़ियों की मौजूदा भूमिका, प्रारूपों में सक्रियता और भविष्य की योजनाओं से जोड़कर देख रहा है।













