भगवान रामलला जी की प्राण-प्रतिष्ठा हिंदुओं के लिए अत्यधिक सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व रखता है – शुभम तिवारी

On: January 10, 2024 6:56 PM

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झारखंड वार्ता न्यूज़
गढ़वा:- युवा समाजसेवी शुभम तिवारी ने कहा कि 22 जनवरी को भगवान रामलला जी की प्राण-प्रतिष्ठा अयोध्या मे होगी और इधर हम सभी को अपने भीतर करनी होगी। पहली प्राण-प्रतिष्ठा मनु-शतरूपा ने की थी। उसके बाद दशरथ, कौशल्या, सीता, हनुमान, कारसेवकों, कोर्ट फिर अब सरकार ने। उत्साह देवालय बन जाने का है। उत्सव उसमें रामलला के स्थापित होने का है,यही प्राण-प्रतिष्ठा है। विश्व में बसा हर भारतीय मन अयोध्या पहुंच चुका है। हर सनातनी का रोम-रोम गौरव से भरा है। इस घटना का साक्षी होकर इतिहास भी धन्य हो गया है। इस अवसर पर क्यों ना हम उन आठ प्रसंगों को समझें। तब ही नौवें क्रम में हमें अपने भीतर भी रामलला को स्थापित करने का सही अर्थ समझ में आएगा। अगर इसी के साथ एक अयोध्या हमने अपने हृदय में भी बसा ली तो फिर शांति, आनंद, प्रसन्नता ढूंढने के लिए संसार में भटकना नहीं पड़ेगा। मनु-शतरूपा हम मनुष्यों के पहले माता-पिता थे। इन्होंने नारायण को प्रसन्न कर वरदान मांगा था कि आप हमारे पुत्र बनो। और वे भगवान राम बनकर संसार में आए। मनु-शतरूपा ही दशरथ-कौशल्या बने। यह राम की पहली प्राण-प्रतिष्ठा थी, जिसमें वो हमें सिखा गए कि मैं यदि ईश्वर होकर मनुष्य बन सकता हूं तो तुम लोग मनुष्य होकर ईश्वर क्यों नहीं बन सकते? सीधी-सी बात है कि ईश्वर ने मनुष्य को असीम संभावनाएं दी हैं। यह राम का पहला संदेश है हमारे लिए। बता दें कि राम मंदिर उद्घाटन कार्यक्रम के लिए विश्व हिंदू परिषद की गेस्ट लिस्ट में अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका सहित 53 देशों के मेहमान शामिल हैं। सबसे अधिक संख्या में निमंत्रण अमेरिका को भेजे गए हैं।