July 26, 2026

राज्य पुलिस कर सकती है केंद्रीय कर्मियों के खिलाफ भ्रष्टाचार मामलों की जांच, CBI की मंजूरी जरूरी नहीं : सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) के तहत केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ राज्य पुलिस या राज्य की विशेष जांच एजेंसियां न केवल एफआईआर दर्ज कर सकती हैं, बल्कि जांच कर आरोप पत्र भी दाखिल कर सकती हैं। इसके लिए सीबीआइ (CBI) से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य नहीं होगा।


जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने सोमवार को यह टिप्पणी करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17 के तहत किसी भी उपयुक्त रैंक का पुलिस अधिकारी इन अपराधों की जांच कर सकता है, चाहे वह राज्य एजेंसी से हो या केंद्रीय एजेंसी से।


धारा 17 में कोई रोक नहीं


पीठ ने स्पष्ट किया कि धारा 17 राज्य पुलिस या राज्य की किसी विशेष एजेंसी को केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार और कदाचार के मामलों में केस दर्ज करने या जांच करने से नहीं रोकती। अदालत ने कहा कि यह धारणा गलत है कि केवल सीबीआइ को ही ऐसे मामलों में जांच या अभियोजन का अधिकार है।


CBI और ACB के कार्यक्षेत्र पर भी दी स्पष्टता


सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक सुविधा और कार्यों के दोहराव से बचने के लिए आमतौर पर सीबीआइ को केंद्र सरकार और उसके उपक्रमों के कर्मचारियों से जुड़े भ्रष्टाचार मामलों की जांच सौंपी जाती है, जबकि राज्य भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) राज्य सरकार और उसके उपक्रमों से जुड़े मामलों की जांच करता है।
हालांकि, यह केवल व्यवस्थागत व्यवस्था है, कोई कानूनी बाध्यता नहीं।


भ्रष्टाचार के अपराध संज्ञेय


पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आने वाले अपराध संज्ञेय प्रकृति के होते हैं, इसलिए राज्य पुलिस को ऐसे मामलों की जांच करने का पूरा अधिकार है।


राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले पर लगी मुहर


यह फैसला राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखते हुए दिया गया है, जिसमें हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के एक कर्मचारी के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार के मामले को रद करने से इनकार कर दिया था।


हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि भले ही आरोपी केंद्रीय सरकारी कर्मचारी हो, फिर भी राजस्थान एसीबी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक मामला दर्ज करने और जांच करने का अधिकार है।


सुप्रीम कोर्ट की दो टूक


सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के दृष्टिकोण को सही ठहराते हुए कहा,
यह कहना पूरी तरह गलत है कि केवल सीबीआइ ही ऐसे मामलों में अभियोजन शुरू कर सकती थी।


फैसले का असर


इस फैसले से देशभर में भ्रष्टाचार के मामलों की जांच प्रक्रिया अधिक प्रभावी और तेज होने की उम्मीद है। साथ ही, यह निर्णय राज्य एजेंसियों के अधिकारों को भी स्पष्ट करता है और भविष्य में जांच को लेकर उठने वाले कानूनी विवादों को कम करेगा।

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