
1948 में कपड़े के पंडाल से शुरू हुई थी पूजा, 1968 में बना देवी मंडप; विसर्जन में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं में रहती है होड़
दिनेश गुप्ता झारखंड वार्ता
रमना (गढ़वा)। प्रखंड मुख्यालय स्थित दुर्गा मंदिर में पिछले 78 वर्षों से लगातार मां दुर्गा की वार्षिक पूजा की जा रही है। वर्ष 1948 में कपड़े के पंडाल से शुरू हुई पूजा आज भव्य आयोजन का रूप ले चुकी है। इस पूजा से प्रखंड मुख्यालय ही नहीं, बल्कि आसपास के गांवों के लोगों की भी गहरी आस्था जुड़ी हुई है। हर साल दुर्गापूजा के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्ष 1948 में सीताराम साह, सुनेश्वर साह, शिवपूजन साह, प्रद्युम्न प्रसाद गुप्ता, गोपाल प्रसाद गुप्ता, शिव साह और मदन साह सहित अन्य लोगों ने पूजा की शुरुआत की थी। उस समय पंचायत के मुखिया बाबू केदारनाथ सिंह समेत कई प्रबुद्ध लोगों ने भी इसमें सहयोग किया था। शुरुआत में कपड़े के पंडाल में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती थी। बाद में स्थानीय लोगों के प्रयास और सहयोग से वर्ष 1968 में देवी मंडप का निर्माण कराया गया। हालांकि, मंदिर निर्माण के दौरान लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था।

कई लोगों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
मंदिर में पूजा की शुरुआत के बाद रामनरेश साह ने कई वर्षों तक पुजारी के रूप में अपनी सेवा दी। इसके बाद गोपाल प्रसाद गुप्ता, राकेश कुमार उर्फ गुड्डू प्रसाद, विश्वजीत कुमार, उपेंद्र प्रसाद, राजेश कुमार, संजय प्रसाद, राजू कुमार, दिनेश गुप्ता, संतोष प्रसाद और ललन गुप्ता सहित अन्य लोगों ने पूजा महोत्सव के आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वर्तमान में दुर्गा मंदिर जय भवानी संघ के तत्वावधान में पूजा महोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है।
तीन किलोमीटर तक कंधों पर ले जाते हैं प्रतिमा
रमना की दुर्गापूजा की एक खास परंपरा प्रतिमा विसर्जन यात्रा है। यहां मां दुर्गा की प्रतिमा को श्रद्धालु अपने कंधों पर उठाकर लगभग तीन किलोमीटर दूर तक ले जाते हैं। प्रतिमा को कंधा देने के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह रहता है। स्थानीय मान्यता है कि विसर्जन यात्रा में मां की प्रतिमा को कंधा देने से उनकी मनोकामना पूरी होती है। इसी आस्था के कारण हर साल बड़ी संख्या में लोग विसर्जन यात्रा में शामिल होते हैं।
गढ़देवी मंदिर से जुड़ी है पूजा की परंपरा
मंदिर के पुरोहित रामचंद्र मिश्रा ने पुरानी परंपराओं को याद करते हुए बताया कि रमना बाजार में हर साल पूरे विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा होती आ रही है। उन्होंने कहा कि यहां की पूजा का गढ़वा स्थित गढ़देवी मंदिर से पुराना संबंध रहा है। आज भी गढ़देवी मंदिर में पूजा की तिथि और समय का मिलान कर यहां पूजा-अर्चना संपन्न कराई जाती है। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी लोगों की आस्था और विश्वास का केंद्र बनी हुई है।





