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42 सालों तक बंद रहा भारत का ये रेलवे स्टेशन, वजह जानकर खड़े हो जाएंगे रोंगटे

On: February 11, 2026 12:32 PM
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Begunkodar Railway Station: भारत रहस्यों, लोककथाओं और अनसुलझी कहानियों का देश रहा है। यहां ऐसे कई स्थान हैं जो इतिहास, विश्वास और डर के अजीब संगम के लिए जाने जाते हैं। इन्हीं में से एक है पश्चिम बंगाल के पुरुलिया ज़िले में स्थित बेगुनकोदर रेलवे स्टेशन, जिसे कभी देश के सबसे डरावने रेलवे स्टेशनों में गिना जाता था। जब आप इस स्‍टेशन के बंद होने की वजहों के बारे में जानेंगे तो आपके भी रोंगटें खड़े हो जाएंगे।

यह स्टेशन वर्षों तक बंद रहा, वजह थी एक ऐसी कहानी, जिसने लोगों के दिलों में इतना डर भर दिया कि रेलवे कर्मचारियों ने यहां काम करने से साफ इनकार कर दिया।

कहां स्थित है बेगुनकोदर स्टेशन?

बेगुनकोदर रेलवे स्टेशन पश्चिम बंगाल के पुरुलिया ज़िले में कोटशीला–मुरी रेल सेक्शन पर स्थित है। यह इलाका झारखंड की राजधानी रांची डिवीजन के अंतर्गत आता है। घने जंगलों और कम आबादी वाले क्षेत्र में बसे इस स्टेशन की भौगोलिक स्थिति ने भी इसके रहस्यमयी माहौल को और बढ़ाया। 1960 के दशक में यह स्टेशन इलाके के विकास की उम्मीद बनकर उभरा था।

संथाल रानी लछन कुमारी के प्रयासों से यहां स्टेशन की शुरुआत हुई थी। स्थानीय लोगों को लगा कि अब उन्हें रोज़गार, बेहतर आवागमन और नई सुविधाएँ मिलेंगी। कुछ समय तक यह स्टेशन सामान्य रूप से संचालित भी होता रहा। लेकिन फिर शुरू हुई एक ऐसी कहानी, जिसने सब कुछ बदल दिया।

साल 1967 में स्टेशन मास्टर ने दावा किया कि उसने रेलवे ट्रैक के पास रात में सफेद साड़ी पहने एक औरत को देखा। बात धीरे-धीरे पूरे इलाके में फैल गई। जल्द ही कई स्थानीय लोगों ने भी दावा किया कि उन्होंने रात के समय पटरियों के आसपास एक रहस्यमयी महिला को घूमते देखा है। कहानी यह बनी कि यह आत्मा एक ऐसी लड़की की है जिसने कभी ट्रेन के सामने आकर आत्महत्या कर ली थी। डर का माहौल ऐसा बना कि शाम ढलते ही स्टेशन सुनसान हो जाता। लोग यहां रुकने से बचने लगे।

अफवाहों के बीच एक घटना ने आग में घी डालने का काम किया। कुछ ही समय बाद स्टेशन मास्टर और उसके परिवार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। आधिकारिक तौर पर इसे किसी अलौकिक घटना से नहीं जोड़ा गया, लेकिन स्थानीय लोगों के मन में यह घटना भूत की कहानी से जुड़ गई। इसके बाद स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कर्मचारियों ने यहाँ ड्यूटी करने से इनकार कर दियाट्रेनों ने इस स्टेशन पर रुकना बंद कर दियाकई महीनों तक स्टाफ तैनात करने की कोशिशें नाकाम रहींआखिरकार रेलवे को स्टेशन बंद करने का फैसला लेना पड़ा।

42 साल तक वीरान रहा स्टेशन

बेगुनकोदर स्टेशन करीब चार दशकों तक वीरान पड़ा रहा। आसपास के लोग इसे भूतिया स्टेशन कहने लगे। कहा जाता था कि जब ट्रेन यहा से गुजरती, तो डिब्बों में भी अजीब सा सन्नाटा छा जाता था। शाम के बाद यहां इंसानों के साथ-साथ जानवर भी दिखाई नहीं देते थे।  ऐसी बातें स्थानीय कहानियों में सुनने को मिलती रहीं।

फिर खुला स्टेशन , लेकिन डर पूरी तरह नहीं गया

1990 के दशक में स्थानीय लोगों ने दोबारा स्टेशन खोलने की मांग शुरू की। अंततः 2009 में तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी की पहल पर बेगुनकोदर स्टेशन फिर से चालू किया गया। आज यह स्टेशन एक हॉल्ट स्टेशन के रूप में काम कर रहा है। यहां सीमित ट्रेनें रुकती हैं। हालांकि आधिकारिक रूप से किसी भूत-प्रेत की बात को कभी स्वीकार नहीं किया गया, लेकिन यह सच है कि लंबे समय तक यहां नियमित स्टाफ तैनात नहीं रहा। स्थानीय लोग आज भी शाम के बाद यहां रुकने से बचते हैं। यह स्टेशन अब हॉन्टेड टूरिज्म में दिलचस्पी रखने वालों के बीच चर्चा का विषय है।

आज ट्रेनें यहां रुकती हैं, यात्री आते-जाते हैं, लेकिन बेगुनकोदर का नाम सुनते ही लोगों के मन में हल्की सिहरन आज भी दौड़ जाती है। आज भी जब कभी रात में इस स्‍टेशन से कोई ट्रेन गुजरती है तो पैसेंजर्स अपनी खिड़कियां गिरा देते हैं।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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