झारखंड की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और हस्तशिल्प को ऐतिहासिक पहचान मिली है। खूंटी जिले के मुरहू में हाथ से बने पारंपरिक ‘मुंडा आभूषण’ को प्रतिष्ठित जीआई टैग दिया गया है. वर्ष 2026 में राज्य के कुल 11 नए उत्पादों को जीआई टैग मिला, जिससे झारखंड के पंजीकृत जीआई उत्पादों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है। इनमें झारक्राफ्ट के तसर सिल्क, आदिवासी आभूषण और बांस शिल्प शामिल हैं। सदियों पुरानी पद्धति और शुद्धता से बने इन गहनों को अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिल रही है। जल्द ही यह आभूषण ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध होंगे, जिससे स्थानीय कारीगरों की आय में वृद्धि होगी और आदिवासी कला को वैश्विक सम्मान मिलेगा।
झारखंड की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और हस्तशिल्प को ऐतिहासिक पहचान मिली है। खूंटी जिले के मुरहू में हाथ से बने पारंपरिक ‘मुंडा आभूषण’ को प्रतिष्ठित जीआई टैग दिया गया है. वर्ष 2026 में राज्य के कुल 11 नए उत्पादों को जीआई टैग मिला, जिससे झारखंड के पंजीकृत जीआई उत्पादों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है। इनमें झारक्राफ्ट के तसर सिल्क, आदिवासी आभूषण और बांस शिल्प शामिल हैं। सदियों पुरानी पद्धति और शुद्धता से बने इन गहनों को अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिल रही है। जल्द ही यह आभूषण ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध होंगे, जिससे स्थानीय कारीगरों की आय में वृद्धि होगी और आदिवासी कला को वैश्विक सम्मान मिलेगा।

