धनबाद: जिले के मुग्मा क्षेत्र में रविवार को एक खदान का हिस्सा धंसने से बड़ा हादसा हो गया। निरसा से झारखंड विकास मोर्चा के विधायक अरूप चटर्जी ने दावा किया है कि इस दुर्घटना में कम-से-कम दो मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं।
विधायक का आरोप है कि यह पूरा हादसा अवैध खनन के दौरान हुआ और पुलिस तथा स्थानीय प्रशासन मामले को दबाने की कोशिश में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि हादसे के बावजूद मौके तक बचाव टीमों के पहुंचने में काफी देरी हुई, जिससे घायल मजदूरों की हालत और बिगड़ गई।
मृतकों की पहचान हुई, एक की मौके पर ही मौत
अरूप चटर्जी के अनुसार, मृतकों में मनोज कोइरी (46) शामिल हैं, जो पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले के रहने वाले थे। एक मजदूर की मौत मौके पर ही हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल दूसरे मजदूर को इलाज के लिए पश्चिम बंगाल ले जाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया।
विधायक ने यह भी बताया कि ठेकेदार ने पश्चिम बंगाल से लगभग 12 मजदूरों को काम के लिए बुलाया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि खदान में सुरक्षा इंतजाम बेहद लचर थे और घटना के बाद राहत-बचाव कार्य समय पर शुरू नहीं हुआ।
प्रशासन ने हादसे की पुष्टि की, जांच शुरू
निरसा के उप-विभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) रजत माणिक बाखला ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। हालांकि, अधिकारियों द्वारा मौके का निरीक्षण कब किया गया और मलबा हटाने की कार्रवाई कब से चल रही है, इस पर उन्होंने अभी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है।
अवैध खनन पर फिर उठे प्रश्न
यह घटना एक बार फिर अवैध और सीमाबद्ध खनन गतिविधियों में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। स्थानीय लोगों और विपक्षी नेताओं ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है, साथ ही पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा और न्याय दिलाने की भी मांग उठाई जा रही है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि अवैध खनन पर समय रहते लगाम लगाई गई होती और सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद होती, तो मजदूरों की जानें बचाई जा सकती थीं।














