---Advertisement---

राज्यसभा से पास हुआ VB–G RAM G बिल, विपक्ष का वॉकआउट; रातभर धरने पर बैठे रहे कई सांसद

On: December 19, 2025 9:42 AM
---Advertisement---

नई दिल्ली: करीब छह घंटे तक चली लंबी और तीखी बहस के बाद राज्यसभा ने देर रात 12.30 बजे ‘विकसित भारत–जी राम जी विधेयक, 2025’ (VB–G Ram G) को ध्वनिमत से पारित कर दिया। यह विधेयक मौजूदा मनरेगा कानून की जगह लेगा और इसके तहत ग्रामीण परिवारों को सालाना 125 दिन का मजदूरी रोजगार देने की गारंटी दी गई है, जो पहले 100 दिन थी। इससे पहले लोकसभा में भी इस विधेयक को मंजूरी मिल चुकी थी।

विधेयक के पारित होने के दौरान उच्च सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिला। विपक्षी दलों ने सरकार पर महात्मा गांधी के नाम को हटाकर रोजगार गारंटी कानून की मूल भावना से समझौता करने का आरोप लगाया। इसी मुद्दे को लेकर राज्यसभा में विपक्ष ने जमकर हंगामा किया और अंततः सदन से वॉकआउट कर दिया। विपक्ष की मांग थी कि बिल को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए। हालांकि सदन में विपक्ष की गैरमौजूदगी के बीच बिल ध्वनिमत से पास कर दिया गया।

राज्यसभा में हंगामा और नारेबाजी

राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के भाषण के बाद जब ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान विधेयक पर सरकार की ओर से जवाब देने के लिए खड़े हुए, उसी दौरान विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। सदन में ‘काला कानून वापस लो, वापस लो’ के नारे गूंजते रहे। विपक्ष के सदस्य आसन के समक्ष आ गए और लगातार विरोध जताते रहे।

सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने कई बार नारेबाजी कर रहे सदस्यों को चेतावनी दी और सत्ता पक्ष की दीर्घा की ओर न बढ़ने का आग्रह किया, लेकिन हंगामा थमने का नाम नहीं लिया। बाद में कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के सांसद विरोध जताते हुए सदन से बहिर्गमन कर गए।

शिवराज सिंह चौहान का पलटवार

हंगामे के बीच ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने बापू के आदर्शों की हत्या की, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार महात्मा गांधी के विचारों को जीवित रखे हुए है।


उन्होंने स्पष्ट किया कि मनरेगा की जगह नया विधेयक लाने और उसमें से महात्मा गांधी का नाम हटाने का मतलब यह नहीं है कि सरकार गांधीजी के योगदान को कमतर आंक रही है।

चौहान ने कहा कि देश में 1960-61 के ग्रामीण जनशक्ति कार्यक्रम से लेकर मनरेगा तक समय-समय पर विभिन्न योजनाएं लाई गईं। यदि किसी योजना से अपेक्षित लक्ष्य पूरा नहीं होता या आंशिक रूप से ही सफलता मिलती है, तो उसे और प्रभावी बनाने के लिए नई योजनाएं लाना सरकार की जिम्मेदारी होती है।

संशोधन प्रस्ताव खारिज

राज्यसभा में विधेयक पर छह घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई। इस दौरान विपक्षी सदस्यों द्वारा लाए गए कई संशोधन प्रस्तावों को सदन ने नामंजूर कर दिया। ग्रामीण विकास मंत्री के जवाब के बाद विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

संसद परिसर में धरना

‘विकसित भारत–जी राम जी विधेयक, 2025’ के पारित होने के बाद विपक्षी दलों का विरोध संसद के भीतर ही नहीं, बल्कि बाहर भी जारी रहा। कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों के सांसद संसद परिसर में संविधान सदन के बाहर धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। TMC के सांसद बिल के खिलाफ रात से ही 12 घंटे के विरोध प्रदर्शन पर बैठे हुए हैं। विपक्ष का कहना है कि यह विधेयक ग्रामीण रोजगार की मौजूदा संरचना को कमजोर करता है और इसे वापस लिया जाना चाहिए।

आगे की राह

सरकार का दावा है कि नया कानून ग्रामीण रोजगार को और मजबूत करेगा और ज्यादा दिनों तक काम की गारंटी देकर ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाएगा। वहीं विपक्ष इसे काला कानून बताते हुए लगातार विरोध की चेतावनी दे रहा है। विधेयक के कानून बनने के बाद इसके प्रभाव और क्रियान्वयन पर सियासी बहस और तेज होने के आसार हैं।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

Join WhatsApp

Join Now