
Agniveer New Exit Plan: अग्निपथ योजना के तहत सेना में भर्ती हुए अग्निवीरों के लिए केंद्र सरकार एक नई एग्जिट व्यवस्था पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य चार साल की सेवा पूरी होने के बाद अग्निवीरों को नौकरी की तलाश में भटकने से बचाना और उनकी अगली सरकारी नौकरी के लिए समय रहते प्रक्रिया शुरू करना है। रक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सेना, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs), पुलिस और अन्य सरकारी विभागों में रोजगार के रास्ते को सेवा समाप्ति से पहले ही तैयार करने की कोशिश की जा रही है।
अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच के अग्निवीर जनवरी 2027 में चार साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। यही वजह है कि सरकार अब उनके पुनर्वास और करियर ट्रांजिशन की व्यवस्था को अंतिम रूप देने पर जोर दे रही है।
25 फीसदी अग्निवीरों के लिए सेना में ही स्थायी सेवा का रास्ता
अग्निपथ योजना के मौजूदा प्रावधानों के तहत प्रत्येक बैच के अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को उनकी चार साल की सेवा के बाद सशस्त्र बलों के नियमित कैडर में शामिल किया जा सकता है। चयन प्रदर्शन और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर किया जाता है।
नई व्यवस्था का फोकस इस प्रक्रिया को इस तरह पूरा करने पर है कि चयनित अग्निवीरों को सेवा समाप्ति और नियमित सेवा में प्रवेश के बीच अनावश्यक अंतराल का सामना न करना पड़े। सूत्रों के अनुसार, इसके लिए सेवा अवधि समाप्त होने से पहले ही मूल्यांकन और मेरिट संबंधी प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी है।
बाकी 75 फीसदी के लिए रोजगार पर फोकस
चार साल की सेवा के बाद नियमित कैडर में शामिल नहीं होने वाले अग्निवीरों के लिए सरकार रोजगार के वैकल्पिक रास्ते तैयार कर रही है। इनमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, पुलिस और अन्य सरकारी विभागों में उपलब्ध अवसरों को एक समन्वित व्यवस्था के तहत जोड़ने की योजना शामिल है।
गृह मंत्रालय को पूर्व अग्निवीरों के करियर प्रोग्रेशन के समन्वय की जिम्मेदारी दी जा चुकी है। मंत्रालय ने इसके लिए अलग Ex-Agniveer Wing और Ex-Agniveer Cell भी स्थापित किया है। इनका उद्देश्य पूर्व अग्निवीरों के लिए पुनर्वास नीतियों का समन्वय और उनकी प्रगति की निगरानी करना है।
CAPF में 50 फीसदी आरक्षण, लिखित परीक्षा और फिजिकल टेस्ट से छूट
पूर्व अग्निवीरों के लिए रोजगार व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में सरकार पहले ही महत्वपूर्ण फैसला कर चुकी है। गृह मंत्रालय ने लोकसभा में बताया है कि CAPFs और असम राइफल्स में कांस्टेबल (GD) और राइफलमैन के पदों पर पूर्व अग्निवीरों के लिए 50 प्रतिशत रिक्तियां आरक्षित की गई हैं।
इसके साथ ही पूर्व अग्निवीरों को निर्धारित अधिकतम आयु सीमा में तीन साल की छूट मिलेगी। पहले बैच के अग्निवीरों को निर्धारित सीमा से अतिरिक्त पांच साल की आयु छूट का प्रावधान है। इन पदों की भर्ती में पूर्व अग्निवीरों को लिखित परीक्षा, Physical Standard Test (PST) और Physical Efficiency Test (PET) से भी छूट दी गई है।
यानी सरकार की मौजूदा व्यवस्था में पूर्व अग्निवीरों के लिए सुरक्षा बलों में दोबारा प्रवेश का रास्ता पहले की तुलना में अलग और अधिक लक्षित बनाया गया है।
SSB में भी 50 फीसदी आरक्षण का प्रावधान
पूर्व अग्निवीरों को लेकर व्यवस्था केवल कुछ चुनिंदा बलों तक सीमित नहीं है। गृह मंत्रालय ने SSB के कांस्टेबल (GD) पदों की भर्ती के नियमों में भी बदलाव किया है। इसके तहत प्रत्येक भर्ती वर्ष में संबंधित पदों पर पूर्व अग्निवीरों के लिए 50 प्रतिशत पद आरक्षित किए जाने का प्रावधान किया गया है।
रेलवे और अन्य सरकारी विभागों में भी अवसर
पूर्व अग्निवीरों के लिए सरकारी क्षेत्र में रोजगार के अन्य विकल्प भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। रेलवे समेत विभिन्न सरकारी विभागों में आरक्षण और प्राथमिकता से जुड़े प्रावधान अलग-अलग स्तर पर लागू किए गए हैं।
हालांकि, अलग-अलग विभागों में आरक्षण की प्रकृति, पदों की श्रेणी और भर्ती प्रक्रिया अलग हो सकती है। इसलिए किसी भी भर्ती के लिए संबंधित विभाग की आधिकारिक अधिसूचना को अंतिम आधार माना जाएगा।
क्या है नए एग्जिट प्लान का असली उद्देश्य?
सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था का मुख्य लक्ष्य चार साल की सेवा और अगली नौकरी के बीच के अंतर को कम करना है। यदि योजना के अनुसार व्यवस्था लागू होती है, तो अग्निवीरों को सेवा समाप्त होने के बाद नए सिरे से नौकरी की तलाश करने के बजाय पहले से उपलब्ध सरकारी अवसरों से जोड़ा जा सकेगा।







