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“देश सवाल पूछ रहा है, केंद्र सरकार जवाब दे”: कांग्रेस नेता अभिजीत कमल

On: July 11, 2026 9:40 AM
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गढ़वा:आज भारत का नागरिक अपने ही देश में जवाब तलाश रहा है। सरकार कहती है कि सब कुछ ठीक है, लेकिन जनता की ज़िंदगी कुछ और कहानी कह रही है।
मैं प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार से कुछ सीधे सवाल पूछना चाहता हूँ।
पहला सवाल – क्या भारत की विदेश नीति वास्तव में स्वतंत्र और मज़बूत है?
प्रधानमंत्री लगातार विदेश यात्राएँ करते हैं और भारत की वैश्विक भूमिका की बात करते हैं। लेकिन क्या इन यात्राओं का ठोस लाभ आम भारतीय को मिला? क्या भारत के राष्ट्रीय हित हर परिस्थिति में सर्वोपरि रखे गए? सरकार देश के सामने इसका स्पष्ट लेखा-जोखा रखे।
दूसरा सवाल – चीन के मुद्दे पर सरकार कब पूरी पारदर्शिता दिखाएगी?
सीमा पर चीन की गतिविधियों को लेकर समय-समय पर गंभीर चिंताएँ सामने आती रही हैं। सरकार संसद और देश को स्पष्ट बताए कि वास्तविक स्थिति क्या है, सीमा की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रश्नों पर पारदर्शिता क्यों नहीं दिखाई जाती?
तीसरा सवाल – महंगाई और बेरोज़गारी पर सरकार की जवाबदेही कहाँ है?
देश का युवा नौकरी चाहता है, लेकिन उसे इंतज़ार मिल रहा है। किसान अपनी फसल का उचित मूल्य चाहता है, लेकिन उसे अनिश्चितता मिल रही है। आम परिवार महंगाई से परेशान है। क्या यही “अमृतकाल” है?
चौथा सवाल – क्या धार्मिक आस्था को राजनीति से ऊपर रखा जाएगा?
राम भारत की आस्था, मर्यादा और सत्य के प्रतीक हैं। यदि राम मंदिर या उससे जुड़े किसी भी आर्थिक या प्रशासनिक विषय पर जनता के मन में प्रश्न हैं, तो सरकार और संबंधित संस्थाओं को पूर्ण पारदर्शिता दिखानी चाहिए। आस्था का सम्मान तभी मजबूत होता है जब उसके साथ जवाबदेही भी हो।
पाँचवाँ सवाल – लोकतंत्र में सवाल पूछना देशविरोध कैसे हो गया?
जो भी सरकार से सवाल पूछता है, उसे निशाना बनाया जाता है। लेकिन लोकतंत्र में सरकार से जवाब मांगना हर नागरिक और विपक्ष का संवैधानिक अधिकार है।
हमारी माँग है—

– महंगाई कम करने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएँ।
– युवाओं के लिए समयबद्ध रोजगार और भर्ती कैलेंडर जारी किया जाए।
– सीमा सुरक्षा और चीन से जुड़े मुद्दों पर संसद में विस्तृत चर्चा कराई जाए।
– विदेश नीति के प्रमुख निर्णयों और उपलब्धियों पर सरकार विस्तृत श्वेत पत्र जारी करे।
– धार्मिक और सार्वजनिक ट्रस्टों से जुड़े वित्तीय मामलों में कानून के अनुसार पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
– लोकतांत्रिक संस्थाओं को स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से कार्य करने दिया जाए।
हम सत्ता नहीं, जवाबदेही की माँग कर रहे हैं। लोकतंत्र में जनता मालिक है और सरकार जनता के प्रति जवाबदेह है।

जय हिंद। जय संविधान।

— अभिजीत कमल
वरीय उपाध्यक्ष गढ़वा सह प्रदेश प्रतिनिधि, झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी

Satish Sinha

मैं सतीश सिन्हा, बीते 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने कई अखबारों और समाचार चैनलों में रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को इमानदारी से उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले तकरीबन 6 वर्षों से मैं 'झारखंड वार्ता' से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ।

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