
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को बड़ा हादसा हो गया। यहां शिव मंदिर के पास एक पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई, जिसके बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हादसे के बाद मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि इसी इमारत में बॉयज हॉस्टल भी था। राहत और बचाव कार्य जारी है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। दमकल विभाग को दोपहर 1:33 बजे इमारत गिरने की सूचना मिली थी। इसके बाद राहत और बचाव कार्य के लिए 12 दमकल गाड़ियां घटनास्थल पर भेजी गईं।
मलबे में PG के छात्रों के फंसे होने की आशंका
बताया जा रहा है कि जिस इमारत का हिस्सा ढहा, वहां PG संचालित हो रहा था। ऐसे में मलबे के नीचे छात्रों समेत कई लोगों के दबे होने की आशंका ने चिंता बढ़ा दी है। बचाव दल लगातार मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों की तलाश कर रहा है।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान 2 से 3 लोगों को मलबे से बाहर निकाले जाने की जानकारी सामने आई है। घायलों को तत्काल अस्पताल भेजा गया है। हालांकि, हादसे में कुल कितने लोग प्रभावित हुए हैं, इसकी अभी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है।
घटना के बाद स्थानीय लोग भी राहत और बचाव अभियान में मदद के लिए आगे आए। पुलिस और दमकल कर्मियों की टीमें मलबे को सावधानी से हटाकर संभावित रूप से फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
विधायक ने घटनास्थल का लिया जायजा
हादसे की जानकारी मिलने के बाद आरके पुरम के विधायक अनिल शर्मा भी मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि बचाव अभियान तेजी से जारी है। उनके मुताबिक, मलबे में कई बच्चों के फंसे होने की जानकारी सामने आई है, हालांकि इस समय यह स्पष्ट कर पाना मुश्किल है कि हादसे में कुल कितने लोग फंसे या घायल हुए हैं।
NSUI ने उठाए सवाल, सरकार से मांगी जवाबदेही
इमारत गिरने की घटना को लेकर NSUI ने भी चिंता जताई है। संगठन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक सत्य निकेतन में इमारत गिरने की खबर बेहद चिंताजनक है और मलबे में DU के छात्रों के दबे होने की जानकारी सामने आ रही है।
NSUI ने प्रशासन और सरकार से राहत-बचाव अभियान को तेज करने तथा हादसे की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संगठन ने छात्रों और आम लोगों की सुरक्षा को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई।
फिलहाल प्रशासन और राहत-बचाव टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद ही हादसे में फंसे लोगों और नुकसान की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।






