---Advertisement---

बिहार वि०स० चुनाव में राजद और कांग्रेस ने झामुमो को किया था दरकिनार अब JMM फोड़ेगी यह ‘बम’!

On: November 18, 2025 8:23 PM
---Advertisement---

झारखंड पॉलिटिक्स

रिपोर्ट सतीश सिन्हा

बिहार विधानसभा चुनाव के पूर्व महागठबंधन घटक दलों में शामिल मुख्य घटक दल झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस ने सौतेला व्यवहार किया था और एक भी सीट बिहार विधानसभा चुनाव के लिए उन्हें नहीं दिया था। बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम में एनडीए गठबंधन को बहुमत मिला है। एनडीए गठबंधन बंपर जीत के साथ एक बार फिर से बिहार में एक बार सरकार बनाने की कवायद में जुट गया है।दूसरी ओर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बिहार विधानसभा चुनाव में सीट न मिलने पर महागठबंधन के साथ तालमेल पर विचार करने की चेतावनी दी थी। इस चेतावनी को सोशल मीडिया पर एक हवा ने ऐसा मोड़ दिया है कि झारखंड की राजनीति में फिर से उथल-पुथल की संभावना की चर्चा है।

भाजपा प्रवक्ता डॉ अजय आलोक के एक पोस्ट में सियासी हलचल तेज कर दिया है। अजय आलोक ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा कि अब नया बम झारखंड में, हेमंत अब जीवंत होंगे। ऐसे में अजय आलोक के इस पोस्ट को सत्ता परिवर्तन से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस ने अजय आलोक के इस ट्वीट को बेबुनियाद करार दिया है।

बिहार के बाद ‘वोटर डिलीशन’ की बड़ी साजिश? कांग्रेस ने 12 राज्यों में SIR पर की समीक्षा बैठक

दावा किया जा रहा है कि बिहार में सीट बंटवारे के दौरान हेमंत सोरेन की पार्टी को सीट न मिलने से वह नाराज बताए जा रहे हैं। इसके बाद से कई तरह की खबरें भी चल रही है। खबर यह है कि झारखंड में भाजपा और झारखंड मुक्ति मोर्चा मिलकर सरकार बना सकती हैं। यही कारण है कि इस तरह के एक्स पोस्ट को लेकर अब चर्चा तेज हो गई है। खबर यह भी है कि बिहार विधानसभा चुनावों में महागठबंधन की करारी हार के कुछ दिनों बाद, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) अब झारखंड में कांग्रेस और राजद के साथ गठबंधन की समीक्षा करने पर विचार कर रहा है।

झामुमो महासचिव विनोद पांडे ने कहा, “बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान राजद और कांग्रेस ने झामुमो के साथ तालमेल नहीं बिठाया; दोनों दलों ने झामुमो को कम करके आंका।” गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनावों में एक प्रमुख गठबंधन सहयोगी होने के बावजूद, राजद ने झामुमो को एक भी सीट नहीं दी और कांग्रेस भी इस मुद्दे पर चुप रही। बाद में, झामुमो ने बिहार में विधानसभा चुनाव न लड़ने का फैसला किया और दावा किया कि यह फैसला उसके सहयोगी राजद और कांग्रेस द्वारा एक “राजनीतिक साजिश” के चलते लिया गया है, जिसके कारण उसे सीटें नहीं मिलीं।

शुरुआत में, झामुमो 16 सीटों पर चुनाव लड़ने को तैयार था, लेकिन बाद में पार्टी ने कहा कि वह 12 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। चुनाव करीब आने पर, वे केवल छह सीटों पर ही समझौता करने को तैयार थे, लेकिन कांग्रेस और राजद ने इससे इनकार कर दिया। गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनावों ने झारखंड के राजनीतिक परिदृश्य में हलचल मचा दी है, जिससे कांग्रेस और राजद को राज्य के सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर संभावित मतभेदों को संभालने के लिए तेज़ी से कदम उठाने के लिए प्रेरित किया है।

Satish Sinha

मैं सतीश सिन्हा, बीते 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने कई अखबारों और समाचार चैनलों में रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को इमानदारी से उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले तकरीबन 6 वर्षों से मैं 'झारखंड वार्ता' से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ।

Join WhatsApp

Join Now